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हिंदी हैं हम : वैज्ञानिक पृष्ठभूमि में राष्ट्रभाषा का महत्व, बता रहे हैं अधिकारी और कर्मी

Fri, 20 Aug 2021 05:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

‘अमर उजाला’ के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ को लेकर सीपीसीबी के पूर्व अधिकारी और दिल्ली पुलिस ने साझा किए विचार 
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हिंदी हैं हम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्तमान परिदृश्य में अन्य भाषाओं के बीच हिंदी आज भी अपने महत्व को बनाए हुए है। यह न सिर्फ लोगों को आपस में जोड़ रही है बल्कि, भावनात्मक रूप से मन की बात को भी एक-दूसरे तक पहुंचा रही है। यही वजह है कि विज्ञान के क्षेत्र से लेकर पुलिस विभाग ने भी इसके महत्व को समझा है और हिंदी को बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

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मैंने विभाग में शुरू कराई प्रतियोगिता
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) में अधिकारी रहने के दौरान मैंने हिंदी निबंध प्रतियोगिता शुरू की थी। इसमें विशेष तौर पर वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया जाता था, जो प्रदूषण को कम करने को लेकर अपने विचारों को हिंदी भाषा में लिखते थे। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य हिंदी को बढ़ावा देना था। खास बात यह है कि यह पहल आज भी विभाग में जारी है। प्रतियोगिता में बेहतर करने वाले वैज्ञानिकों को हिंदी दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाता है।

हिंदी को बढ़ावा देने के लिए मैंने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) में आमंत्रण मिलने पर हिंदी में व्याख्या भी दी है। उस दौरान उदयपुर स्थित एक विश्वविद्यालय में पहुंचकर हिंदी में संबोधन किया था। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से होने के नाते लोग मुझसे अंग्रेजी में बोलने व लिखने की अपेक्षा रखते थे। ऐसे में हिंदी में वैज्ञानिक विषयों में बोलना और सरल भाषा में अपनी बात को अन्य लोगों तक पहुंचाना अलग अनुभव होता है। वर्ष 1990 में मैंने आईएसओ-9000 के बारे में भी हिंदी में अपने विचारों को लिखा था।
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इसके अलावा प्रदूषण से कैंसर समेत अन्य विषयों पर भी हिंदी में ही लिखा है। हिंदी में गोष्ठी का आयोजन करना आदत में था। इस दौरान हिंदी के विशेषज्ञों को बुलाया जाता था। गोष्ठी के दौरान विशेषज्ञ विज्ञान के तकनीकी शब्दों को आसान तरीके से लिखने के बारे में चर्चा करते थे। 
- डॉ. सुशील कुमार त्यागी, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड


 

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महकमे में शुद्घ हिंदी लिखने के हैं आदेश

मुझे हिंदी पढ़ने-लिखने की अच्छी समझ है। हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दिल्ली पुलिस के कार्यों की हिंदी विज्ञप्ति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले पुलिस की ओर से सिर्फ अंग्रेजी में ही विज्ञप्ति जारी की जाती थी। पिछले ढाई महीने से हिंदी में भी कदम बढ़ाए गए हैं। मैं पुलिस की सभी विज्ञप्ति को हिंदी में लिखता हूं। कई बार तकनीकी शब्दों को हिंदी में लिखने के दौरान परेशानी भी होती है, लेकिन इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से सहायता लेता हूं।

कई बार कुछ समझ नहीं आता है तो इंटरनेट की मदद से हिंदी के शब्दों को सीखता व अर्थ समझता हूं। पहले पुलिस की फाइलों को तैयार करने में उर्दू के शब्दों को इस्तेमाल कर लेते थे, परंतु अधिकारियों के आदेश के बाद से अब शुद्ध हिंदी के प्रयोग पर ही जोर होता है। इससे अन्य भाषाओं को जोड़कर हिंदी को प्रदूषित नहीं किया जाए। यही वजह है कि हिंदी को पूर्ण रूप से शुद्ध लिखने की कोशिश रहती है। इसके लिए लगातार प्रयास भी जारी है।
- गौरव पंवार, उप निरीक्षक, प्रेस रिलीज ऑफिसर, दक्षिण पूर्वी जिला
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