हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला
हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को रिहा करने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने चौटाला की पैरोल अवधि भी 12 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। विशेष सीबीआई अदालत ने चौटाला को जनवरी 2013 में दस साल कैद की सजा सुनाई थी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल एवं न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ चौटाला की बुजुर्गों एवं दिव्यांगता के आधार पर समय से पूर्व रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। चौटाला ने अधिवक्ता अमित साहनी के जरिये कहा है कि उनकी रिहाई के संबंध में हाईकोर्ट ने नवंबर 2019 एवं फरवरी 2020 में दिल्ली सरकार को उचित फैसला लेने का निर्देश दिया था। सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है।
चौटाला ने अपनी उम्र और दिव्यांगता के आधार पर जेल से रिहाई की मांग की गई है। इससे पहले दायर याचिका में चौटाला ने केंद्र सरकार के 18 जुलाई, 2018 की अधिसूचना का हवाला दिया था। अधिसूचना के तहत 60 साल से ज्यादा उम्र पार कर चुके पुरुष, 70 फीसदी वाले दिव्यांग व बच्चे अगर अपनी आधी सजा काट चुके हैं तो राज्य सरकार उसकी रिहाई पर विचार कर सकती है।
याचिका में चौटाला ने कहा है कि उनकी उम्र 86 साल की हो गई है और भ्रष्टाचार के मामले में वे सात साल की सजा काट चुके हैं। चौटाला ने यह भी दावा किया था कि वह अप्रैल 2013 में 60 फीसदी दिव्यांग हो चुके थे और जून 2013 में पेसमेकर लगाए जाने के बाद से वह 70 फीसदी से ज्यादा दिव्यांग हो चुके हैं। इस तरह से वे केंद्र सरकार के जल्दी रिहाई की सभी शर्तों को पूरा कर रहे हैं।
हालांकि, दिल्ली सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह भ्रष्टाचार का मामला है और भारत सरकार की अधिसूचना इस पर लागू नहीं होती। जबकि चौटाला ने दलील दी थी कि उन्हें रिहा किया जाना चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सात साल की सजा पूरी हो चुकी है।
वर्ष 2000 के 3206 जूनियर शिक्षक भर्ती मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 2013 में ओपी चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला समेत 53 लोगों के खिलाफ सजा सुनाई थी। इसमें तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा के निदेशक आईएएस अधिकारी संजीव कुमार भी शामिल थे।