हाईकोर्ट ने ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा की अचानक कमी को गंभीरता से लिया है। अदालत ने कहा कि जब यह दवा स्थानीय स्तर पर निर्मित होती है तो अचानक इसकी आपूर्ति कम कैसे हो गई। अदालत ने केंद्र व दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सरकार को इस दवा के स्टॉक, आपूर्ति व वितरण की पूरा जानकारी आज पेश करने का निर्देश दिया है। दरअसल, ब्लैक फंगस के इलाज के लिए मेडिसिन एम्फोटेरिन बी की कमी का मुद्दा अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा ने सुनवाई के दौरान उठाया।
उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा बीमारी के इलाज के लिए दवा की मांग से संबंधित पारित एक आदेश का भी हवाला दिया। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने माना कि दवा की कमी है और रेमडेसिविर की हालत से भी बदतर है।
इस बीच दिल्ली सरकार ने केंद्र से दवा की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक समिति बनाई गई है जो दिन में दो बार बैठक करती है लेकिन जब स्टॉक नहीं होता तो वे बफर स्टॉक नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि दिल्ली ही नहीं अन्य राज्यों में भी दवा का अभाव है और केंद्र सरकार राशन के समान दवा का वितरण कर रही है।
अदालत ने कहा कि यह गंभीर मामला है। अदालत ने केंद्र व दिल्ली सरकार के वकीलों को सरकार से इस मसले पर निर्देश लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत ने कहा कि आपको विस्तार से बताना होगा कि क्या अड़चन है। हमें इसका समाधान करना चाहिए। दवा का स्थानीय स्तर पर उत्पादन होता है फिर भी इसकी कमी कैसे हो गई। अदालत ने कहा कियह कृत्रिम कमी का मामला नहीं होना चाहिए।
दूसरी ओर अदालत ने कोविड दवाओं और उपकरणों की कालाबाजारी पर आरोपियों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाए।