नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने वाले बच्चों के लिए मूल्यांकन योजना पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने उसे स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि ऐसे बच्चों को अंक प्रदान करने के लिए क्या नीति तय की गई है।
न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने याचिकाकर्ता पायल बहल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 29 जुलाई तय की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी बेटी भी इस साल दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में निजी छात्र के तौर पर शामिल होने वाली थी। कोरोना महामारी के मद्देनजर सीबीएसई ने अप्रैल माह में परीक्षा रद्द कर दी।
याची ने अदालत को बताया कि जो बच्चे स्कूल के जरिये परीक्षा में शामिल होने वाले थे, सीबीएसई ने उनके मूल्यांकन और अंक देने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। वहीं निजी छात्र के तौर पर परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों बच्चों का मूल्यांकन कैसे होगा। किस आधार पर अंक दिए जाएंगे इस बारे में अब तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।
बहल ने न्यायालय को बताया कि अपनी इस चिंता के बारे में उसने सीबीएसई को ज्ञापन भी दिया था, लेकिन अभी तक उस पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लाखों बच्चों और उनके माता-पिता/अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित हैं।