नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी में अपनी जान गंवाने वाले मृत दिल्ली पुलिस कांस्टेबल अमित कुमार के परिजनों को एक करोड़ की अनुग्रह राशि देने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित की गई एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि अभी तक क्यों नहीं दी गई।
अवकाशकालीन न्यायमूर्ति अमित बंसल ने सरकार को अगली सुनवाई 23 जुलाई से पहले अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इससे पूर्व अदालत के समक्ष याची ने तर्क रखा कि मृतक कांस्टेबल कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम योद्धा के रूप में सेवारत था और 5 मई 2020 को उसकी मृत्यु हो गई।
पीड़ित परिवार एवं मृतक की पत्नी की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा किए गए एक ट्वीट का हवाला दिया। इस ट्वीट में दिल्ली पुलिस के दिवंगत कांस्टेबल द्वारा किए गए बलिदान को देखते हुए उन्होंने उक्त अनुग्रह राशि मृतक के परिवार के सदस्यों को दिए जाने की घोषणा की थी। उक्त राशि का भुगतान घोषणा के एक वर्ष बाद भी अभी तक नहीं किया गया है।
मृतक कांस्टेबल की पत्नी ने दायर याचिका में कहा कि उसका पति उत्तर-पश्चिम जिले के भारत नगर थाने में तैनात था। वह दिल्ली पुलिस के पहले जवान थे, जो कोरोना के घातक वायरस का शिकार हुए थे।
याची के अधिवक्ता ने कहा कि उनकी मुवक्किला के 5 साल और 5 महीने की उम्र के दो छोटे बच्चे हैं। याचिका में कहा गया है कि 7 मई 2020 को दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय से एक ट्वीट किया गया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली के लोगों की सेवा करते हुए कोरोना के लिए अपनी जान गंवाने वाले बहादुर पुलिस कर्मी अमित को सलाम करते हैं।
इस ट्वीट में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि अमित के परिवार को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा याचिकाकर्ता ने सरकार को कई आवेदन देकर मुख्यमंत्री के वायदे के अनुसार एक करोड़ रुपये देने का आग्रह किया। बावजूद इसके वे लोग मुआवजे के लिए भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन दिल्ली सरकार की ओर से उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को निर्देश दिया जाए कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये प्रदान किए जाएं ताकि परिवार का उचित तरीके से भरणपोषण हो सके और बच्चों को भी उचित शिक्षा मिल सके।