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सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग पर जवाब तलब

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने आसिफ खान उर्फ आशु भाई गुरु जी व उनके बेटे समर खान द्वारा सामूहिक दुष्कर्म मामले में दायर याचिका पर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से जवाब मांगा है। याचिका में शिकायतकर्ता लड़की और उसके साथियों के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज करने व जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। याचिका में संबंधित पुलिस उपायुक्त की संदिग्ध भूमिका का भी हवाला दिया गया है।
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न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने पुलिस को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 22 मार्च तय की है। याची की ओर से पेश अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने अदालत को बताया कि आशु भाई गुरु जी पर सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली उसी लड़की ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सी.पी.डब्ल्यू.डी.) के दो उच्च अधिकारियों पर भी सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करवाया है।
अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने तर्क रखा कि हाई प्रोफाइल लोगों पर झूठे दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज करा लड़की और उसके साथी साजिश के तहत संगठित तरीके से करोड़ों रुपये की जबरन वसूली करते हैं। याचिका में अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी की भी संदिग्ध भूमिका है।
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उन्होंने कहा कि स्वयं को राम नरेश शर्मा (शिकायतकर्ता लड़की का साथी) उपायुक्त का एजेंट बताकर आशु भाई गुरु जी केस में सात करोड़ रुपये मांग रहा है। उन्होंने कहा कि दाती महाराज दुष्कर्म मामले में भी इसकी संदिग्ध भूमिका रही है। उन्होंने राम नरेश शर्मा के 50 से ज्यादा रिकॉर्डिंग व्हाट्सएप चैट को याचिका के साथ संलग्न करते हुए कहा कि इस चैट में वह सात करोड़ रुपये की डिमांड कर रहा है।
याचिका में लड़की को बड़े लोगों के खिलाफ दुष्कर्म के झूठे मुकदमे दर्ज करा कर करोड़ों रुपये ऐंठने का आदी बताया गया है। आशु बाबा उर्फ आशु भाई गुरु जी उर्फ आसिफ खान उनके बेटे समर खान मैनेजर रविशंकर व बिल्डर सौरभ कुमार के खिलाफ 8 सितंबर 2019 को हौज खास थाने में सामूहिक दुष्कर्म छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। लड़की ने दूसरा केस मंडावली थाने में जून 2019 में दर्ज कराया लेकिन पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण की पहले से पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस द्वारा कोई जांच नहीं की गई क्योंकि इस पूरे प्रकरण में क्राइम ब्रांच के उच्च अधिकारी का नाम आ रहा है। अधिवक्ता विशाल ने अदालत से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।
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