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पुलिस कॉलोनी में भूमि पर कब्जे पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शालीमार बाग स्थित पुलिस कॉलोनी की भूमि पर अतिक्रमण पर हैरानी जताई है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस की जमीन पर कब्जा काफी मनोरंजक पूर्ण लगता है। अदालत ने यह टिप्पणी कालोनी में अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने पुलिस कालोनी में कब्जे पर कहा कि यह गंभीर मामला है। यदि पुलिस कालोनी में ही अनाधिकृत कब्जा है और पुलिस उसे हटा नहीं पाई तो राजधानी में कब्जों की क्या स्थिति होगी। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार, पुलिस और उत्तरी दिल्ली नगर निगम को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और उन लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है जिन पर अनाधिकृत कब्जे का आरोप है। अदालत ने सभी पक्षों को 12 अप्रैल तक पूरी स्थिति पर विस्तृत जवाब दाखिल करने व कब्जे हटाने के संबंध में की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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पुलिस कॉलोनी निवासी अनिल कुमार ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि भूमि पर कब्जा करने वालों से जुड़े एक आपराधिक मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निष्कर्ष निकाला था कि उन्होंने पुलिस की जमीन पर अतिक्रमण कर एक मकान बनाया है। बावजूद इसके वे न तो दिल्ली पुलिस के कर्मचारी हैं और न ही कॉलोनी में उन्हें कोई जमीन आवंटित की गई है ।
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याची ने दावा किया है कि अदालत द्वारा की गई टिप्पणी के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
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