उच्च न्यायालय ने माना है कि अवैध रूप से इंटरसेप्ट किए गए संदेशों और ऑडियो वार्तालापों को सबूत के रूप में अनुमति देने से मनमानी बढ़ जाएगी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को बढ़ावा मिलेगा। अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में एक आरोपी के खिलाफ तय अभियोग आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2) के अनुसार किसी भी सार्वजनिक आपात स्थिति या सार्वजनिक सुरक्षा के हित में कानून के अनुसार अवरोधन का आदेश जारी किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने पीयूसीएल के मामले में इसे स्पष्ट किया हुआ है।
अदालत ने जतिंदर पाल सिंह नाम के आरोपी के खिलाफ विशेष सीबीआई न्यायाधीश के 10 साल पुराने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत अभियोग तय करने संबंधी फैसले को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा है कि टेलीग्राफ एक्ट के तहत बनाए गए नियमों के नियम 419ए के तहत गृह सचिव द्वारा टेलीफोन पर बातचीत को इंटरसेप्ट करने की अनुमति देने के निर्देश को आदेश पारित होने के सात दिनों के भीतर समीक्षा समिति को अग्रेषित किया जाना है। इस मामले में रिकॉर्ड में कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि गृह सचिव के आदेश की कोई समीक्षा की गई।