हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाइल्ड कस्टडी के मुद्दों को एक औपचारिक तरीके से तय नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एक नाबालिग बच्चे की कस्टडी से संबंधित मुद्दों को उचित देखभाल और विचार के साथ तय किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह टिप्पणी बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपने के आदेश को मां द्वारा चुनौती देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने सभी पक्षों को एक अवसर देकर इस मुद्दे को तय करने के लिए परिवार अदालत में मामला वापस कर दिया।
याची मां ने आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि उसे सुनवाई का मौका दिए बिना पारित कर दिया गया। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को दिए फैसले में कहा फैमिली जज को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती कि संबंधित पक्षों को सुनवाई का मौका दिया जाए।
इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एक नाबालिग बच्चे की कस्टडी से संबंधित मुद्दों को उचित देखभाल और विचार के साथ तय किया जाना चाहिए। उन्हें किसी भी मामले में वर्तमान मामले में किए गए औपचारिक तरीके से तय नहीं किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि चुनौती दिए गए आदेश को एकतरफा बना दिया गया है प्रधान न्यायाधीश को बच्चे की कस्टडी के मुद्दे पर फिर से विचार करने और सभी संबंधित पक्षों को उचित नोटिस के साथ इस पर नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश दिया जाता है।
याचिकाकर्ता मां ने बच्चे की कस्टडी पिता को सौंपने के साकेत फैमिली कोर्ट के 11 अप्रैल 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने पिता को बच्चे की कस्टडी वापस करने और यथास्थिति बहाल करने का निर्देश देने की मांग की थी जैसा कि 8 अप्रैल 2022 को मौजूद था।
याची ने कहा कि बच्चे के पिता ने मई 2021 में घर छोड़ दिया था। उसने बच्चे की कस्टडी के लिए याचिका फरवरी 2022 में दायर की गई थी। इस अवधि के दौरान बच्चा याचिकाकर्ता मां की देखभाल में रहा था।
लूटपाट के एक आरोपी को अग्रिम जमानत दूसरे की अर्जी खारिज
हाईकोर्ट ने लूटपाट, जान से मारने की धमकी सहित विभिन्न धाराओं में आरोपी अली काजिम को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। वहीं, दूसरे आरोपी सलमान मेहंदी को जमानत प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा, आरोपी की मामले में भूमिका और पिस्तौल की बरामदगी के ध्यानार्थ जमानत देना उचित नहीं है।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंहदीरत्ता ने कहा कि सभी तथ्यों का देखने से स्पष्ट है कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि वक्फ संपत्ति के प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकदमा चल रहा है और प्रबंधन को सौंपने के संबंध में आरोपी पक्ष के पक्ष में कुछ आदेश पारित किए गए हैं। अदालत ने उन्हें 30 दिन का समय प्रदान किया था जिसकी अवधि 12 फरवरी तक समाप्त नहीं हुई थी और आगे एक अपील की गई है जिसमें आदेश पर रोक लगा दी गई थी।