Former IPS Ajay Raj Sharma and Delhi Riots
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उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली दंगों में 23 वर्षीय फैजान की मौत की जांच की धीमी प्रगति पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। आरोप है कि फैजान को कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया गया था। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने सीलबंद लिफाफे में पुलिस द्वारा दायर की गई स्थिति रिपोर्ट पर नाखुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नहीं है।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हालांकि वायरल वीडियो में पांच लोगों को पुलिस ने पीटा था, लेकिन घटना के दो साल बाद भी मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। वे पांच बच्चे थे जिनके साथ मारपीट की गई, इनमें से एक की मौत हो चुकी है। यह हत्या का अपराध है। इस मामले में आपने प्रत्यक्षदर्शियों की मदद नहीं ली है। कोर्ट की यह कड़ी टिप्पणी तब आई जब वह फैजान की मां द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कर्दमपुरी में पुलिसकर्मियों ने फैजान पर बेरहमी पूर्ण रवैया अपनाते हुए उसकी पिटाई की और फिर उसे अवैध हिरासत में ले लिया गया। पुलिसकर्मियों ने उसे किसी भी चिकित्सा से वंचित कर दिया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मृतक की की मां ने पूरी घटना की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।
दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की गई है क्योंकि इसकी जांच चल रही है और लोगों की पहचान की जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि फैजान की मौत के संबंध में अब तक एक हेड कांस्टेबल की पहचान की जा चुकी है और उससे पूछताछ की जा रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि घटना के कई चरण हैं। जबकि फैजान और अन्य को पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सड़क पर पीटा गया था, बाद में उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेने के लिए ज्योति नगर के पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
ग्रोवर ने कहा इस तथ्य के बावजूद कि रिहा होने के कुछ ही घंटों बाद फैजान की मृत्यु हो गई, दिल्ली पुलिस ने अभी तक ज्योति नगर पुलिस स्टेशन में दस्तावेजों को सील नहीं किया है और ड्यूटी पर एक भी अधिकारी से अब तक पूछताछ नहीं की गई।