नई दिल्ली। एक कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशरशिप लेने में हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपी ने कंपनी में कार्यरत अधिकारी का ही अपहरण कर फिरौती वसूल ली। हाईकोर्ट ने आरोप को गंभीरता से लेते हुए मेरठ निवासी मुख्य आरोपी के भाई को जमानत प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा इस मामले में आजीवन कारावास से मृत्युदंड तक का प्रावधान है। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा पेेश साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी अमित कंसल मुख्य आरोपी नितिन कंसल का भाई है। इसके अलावा वह अपने भाई के साथ उसी के मकान में साथ रहता है। वहीं से अपहृत मुकेेश को पुलिस ने बरामद किया था।
अदालत ने कहा कि इसके अलावा वह लगातार अपने भाई के संपर्क में था। अपराध की गंभीरता व तथ्यों को देखने के बाद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह साक्ष्यों को नष्ट करने के साथ गवाहों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
करोल बाग थाना पुलिस ने यह मामला मुकेश की पत्नी लक्ष्मी के बयान पर दर्ज किया था। उन्होंने शिकायत में कहा था कि उनका पति आईएनए के पास मीटिंग की बात कह कर गए थे। रात को करीब 9.30 पति का फोन आया कि दो लाख रुपये, जेवरात च चेकबुक लेकर शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर पंकज को दे दो। उनकी बेटी ने यह सब कर दिया। अगले दिन पुन: फोन पर चार लाख रुपये का प्रबंध करने का को कहा गया।
पुलिस ने इस शिकायत पर फोन की लोकेशन के आधार पर ट्रांसपोर्ट नगर मेरठ के एक मकान में छापामार कर मुकेश को मुक्त करवा कर नितिन कंसल को गिरफ्तार कर लिया। मुकेश ने पुलिस को बताया कि वे जिरक पुर में एक कंपनी के दिल्ली कार्यालय में काम करते हैं। नितिन ने उनकी कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशरशिप ली थी। सिंतंबर 2020 में नितिन ने बताया कि उसका सामान नहीं बिक रहा और वापस करवा दे।
उन्होंने कहा वह नितिन को जिरक पुर कंपनी में ले गया। उसी दौरान नितिन और वे एक होटल में रुके। नितिन ने वहां एक लड़की को बुलवाया व उसके आपत्तिजनक फोटो ले लिए और 10 से 15 लाख रुपये मांगे। मुकेश के अनुसार उसके अपहरण के षड्यंत्र के तहत नितिन के ही एक आदमी विवेक ने कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशरशिप लेने के बहाने 6 अक्तूबर 2020 को उसे आईएनए के पास बुलवाया और उसका अपहरण कर मेरठ ले गए।