नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सात वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक कृत्य के आरोपी से उसके पिता द्वारा समझौता करने के निर्णय पर नाराजगी जताई है। अदालत ने समझौता याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में पिता पीड़ित नहीं है और उसे इस प्रकार का समझौता करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा समाज में भी यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि अपराध करने के बाद समझौता किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने आरोपी सुनील रैक्वार व पीड़ित बच्चे के पिता के बीच समझौते को नकारते हुए कहा कि पीड़ित की आयु मात्र सात वर्ष है। अदालत ने कहा अपराध काफी गंभीर प्रकृति का है और आरोपी के खिलाफ धारा 377 के अलावा पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। पोक्सो एक्ट में बच्चों को सुरक्षा प्रदान की गई है लेकिन इस प्रकार के समझौते से सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
अदालत ने पिता व आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि निकट के दोस्तों व परिवार के लोगों के हस्तक्षेप पर समझौता किया गया है। अदालत ने कहा कि यदि समझौते की इजाजत प्रदान की गई तो समाज पर विपरीत प्रभाव होगा। इस मामले में आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दायर होने के अलावा पीड़ित बच्चे के बयान दर्ज हो चुके हैं। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हए याचिका खारिज कर रहे हैं।
पेश मामला वेस्ट पेटल नगर का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 20 नवंबर 2019 को पड़ोस में रहने वाले आरोपी ने बच्चे को अकेला देख उससे अप्राकृतिक कृत जैसी घिनोनी वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।