कहा-पेड़ों की देखभाल और हल्की छंटाई आवश्यक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बारिश के बाद पेड़ों के गिरने और देखभाल को लेकर एमसीडी की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि प्राधिकरण अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। पेड़ों की देखभाल और हल्की छंटाई आवश्यक है ताकि पैदल यात्रियों और सड़क उपयोगकर्ताओं का जीवन सुरक्षित रहे। कोर्ट ने सवाल उठाया कि हमने एक जान गंवाई है। एमसीडी के लिए इससे ज्यादा आंख खोलने वाली बात और क्या हो सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को द्वारका में पेड़ों की छंटाई करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि पेड़ों की छंटाई के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। यह टिप्पणी एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान आई जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के बावजूद संबंधित प्राधिकरण पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। याचिका में कहा गया कि मृत शाखाओं और पेड़ों के अन्य हिस्सों के गिरने से संपत्ति और जानमाल का नुकसान हुआ है। साथ ही सड़कों और फुटपाथों पर सुगम आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई है। खंडपीठ ने याचिका के साथ दायर की गई तस्वीरों की जांच की और पेड़ों की छंटाई के लिए प्राधिकरणों का तत्काल ध्यान मांगा।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वन और वन्यजीव विभाग द्वारा जारी अधिसूचना का हवाला दिया जिसमें सड़कों और पार्कों के पास पेड़ों की छंटाई के लिए विस्तृत दिशानिर्देश दिए गए हैं। खंडपीठ ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे दक्षिण-पश्चिम जिले के द्वारका क्षेत्र में 10 दिनों के भीतर एक सर्वेक्षण करें ताकि छंटाई की आवश्यकता वाले पेड़ों की संख्या का पता लगाया जा सके।