नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पर्याप्त समय देने के बाद भी द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल को शुरू करने को लेकर दिल्ली सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि हमारे पास 12 सौ बेड का अस्पताल है और उसे तत्काल शुरू करने से हम बड़ी संख्या में लोगों को राहत दे सकते हैं। यदि इसे हम अगस्त में शुरू करेंगे तो इसका उद्देश्य खत्म हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि अस्पताल को वह तुरंत शुरू करें। पीठ ने उक्त टिप्पणी के साथ ही सरकार को 28 मई को जवाब दाखिल करने को कहा है।
खंडपीठ ने कहा कि सरकार को अस्पताल को अब से कई महीने पहले शुरू करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि कई एजेंसियां मामले में काम कर रही है और इसके कारण वक्त लग रहा है। इस तर्क पर पीठ ने कहा कि अगर कोई समस्या है तो आप हमें बताएं। हम अभी सभी एजेंसियों को नोटिस जारी कर सबका पक्ष मांगेंगे। समस्या को खत्म करने में दिल्ली सरकार की मदद करेंगे।
मेहरा ने कहा कि सभी एजेंसियां दिल्ली सरकार की हैं और वे शुक्रवार को हर पहलू पर जवाब दाखिल करेंगे। सुनवाई के दौरान द्वारका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व अधिवक्ता वाईपी सिंह ने पीठ को बताया कि यह अस्पताल मार्च 2020 में ही शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन इसके बाद भी एक साल बीत चुका है और अब तक ये शुरू नहीं हुआ। दिल्ली सरकार आदेश के बावजूद भी जवाब नहीं दाखिल कर रही है।
उन्होंने पीठ को बताया कि 24 मई की सुबह नौ बजे तक अस्पताल में 250 आक्सीजन बेड रखे गए हैं, लेकिन कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया है। पिछली सुनवाई पर भी पीठ ने कहा था कि सरकार की सुस्ती के कारण ये परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है।