नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य एवं जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। नरवाल ने निचली अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के फैसले का चुनौती दी है। उन्हें फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए के विरोध में हुए दंगे से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तारीख तय की है। दिल्ली पुलिस की ओर से स्थाई अधिवक्ता अमित महाजन ने नोटिस स्वीकार किया और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय मांगा। पीठ ने कहा कि रिपोर्ट की एक प्रति नताशा के वकील को दी जाए और तय समय में कोर्ट में पेश किया जाए।
इस मामले में नरवाल और समूह की एक अन्य सदस्य देवांगना कलीता को उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले के संबंध में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मई में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके खिलाफ दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराओं में मामला दर्ज किया था। इन पर दंगों की साजिश में शामिल होेने के आरोप में रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) का भी मामला दर्ज है।
सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली के अलग अलग इलाकों में 24 फरवरी को सांप्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें 53 लोगों की जान गई और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। दंगे के संबंध में कलीता के खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए, जबकि नताशा के खिलाफ तीन मामले दर्ज हुए।
निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और कलीता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और जांच अभी लंबित है। कलीता ने भी निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है जिस पर 14 अगस्त को सुनवाई होनी है।