नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर को मंगलवार को सशर्त जमानत दे दी। दिल्ली पुलिस ने सफूरा को मानवीय आधार पर जमानत देने का मंगलवार को विरोध नहीं किया। हालांकि सोमवार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध करते हुए था कि गर्भावस्था को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर की एकल पीठ ने मंगलवार को सफूरा जरगर को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत प्रदान की। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश को इस मामले में या किसी अन्य मामले में मिसाल के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए।
पीठ ने सफूरा को निर्देश दिया कि वह ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगी जिससे मामले की जांच प्रभावित हो। वहीं, उन्हें दिल्ली से बाहर जाने से पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी और प्रत्येक 15 दिनों में उन्हें जांच अधिकारी से फोन पर संपर्क करना होगा। पुलिस ने सफूरा को 10 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। सफूरा पर जाफराबाद इलाके में लोगों को सीएए के विरोध में दंगे के लिए भड़काने का आरोप हैं।
पुलिस का दावा है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगे के मुख्य साजिशकर्ताओं में सफूरा भी शामिल थी। गर्भवती होने से उसके द्वारा किए गए अपराध की प्रकृति बदल नहीं सकती है। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा था कि जेल में पिछले 10 सालों में 39 बच्चों का जन्म हुआ है और जेल में प्रसव के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। उसे गर्भवती होने के आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
इससे पहले सफूरा ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी जिसे 4 जून को खारिज कर दिया था। इस फैसले को सफूरा ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया कि वह सफूरा 23 सप्ताह की गर्भवती हैं और उन्हें जेल में कोरोना संक्रमण होने का खतरा है।