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दिल्ली: डीपफेक और धमकियों से परेशान महिला को हाईकोर्ट से राहत, सुरक्षा देने और ऑनलाइन सामग्री हटाने के निर्देश

Fri, 25 Sep 2026 05:48 PM IST
Digvijay Singh एंजेसी

सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। महिला ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े प्रदर्शन की कथित छेड़छाड़ और आपत्तिजनक तस्वीरों के प्रसार के बाद धमकियों का आरोप लगाया था। 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। महिला ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े प्रदर्शन की कथित छेड़छाड़ और आपत्तिजनक तस्वीरों के प्रसार के बाद धमकियों का आरोप लगाया था। उसने अदालत से अपनी सुरक्षा और ऑनलाइन सामग्री हटाने की मांग की थी।

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न्यायमूर्ति गिरीश ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का आवासीय पता गोपनीय रखा जाए। उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल संबंधित पुलिस अधिकारियों को सूचित किया जाए। अदालत ने मेटा को भी निर्देश दिया कि वह जांच एजेंसी से संबंधित वेब लिंक प्राप्त होने पर कार्रवाई करे। मेटा को अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से कथित आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाना होगा। दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर एफआईआर में की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। पुलिस को याचिकाकर्ता को प्रदान की गई सुरक्षा के संबंध में दो सप्ताह के भीतर एक और स्थिति रिपोर्ट देनी होगी। अदालत ने सीजेपी कार्यकर्ताओं/नेताओं अभिजीत डुपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को नोटिस जारी किया। इन सभी को याचिका में निजी प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है।

याचिकाकर्ता की सुरक्षा के निर्देश
यह निर्देश वकील उमेश चंद्र शर्मा द्वारा प्रतिनिधित्व की गई महिला की आपराधिक रिट याचिका पर पारित हुए। याचिकाकर्ता ने कथित धमकियों के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को महिला की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। उसके आवासीय पते की गोपनीयता बनाए रखना भी अनिवार्य है।
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ऑनलाइन सामग्री हटाने के आदेश
अदालत ने सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों से कथित रूप से छेड़छाड़ की गई और डीपफेक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया। मेटा को जांच एजेंसी से वेब लिंक मिलने के बाद तुरंत यह सामग्री हटानी होगी। यह कदम महिला की निजता और सुरक्षा के लिए उठाया गया है। याचिका में विशेष रूप से ऐसी सामग्री को हटाने की मांग की गई थी।

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