न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने खबरों का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को कहा था कि एलएनजेपी अस्पताल में कोविड-19 के शवगृह में 108 शव हैं, जिनमें से 28 फर्श पर एक-दूसरे के ऊपर ही पड़े हैं क्योंकि केवल 80 शव रखे जाने की ही व्यवस्था है। अगर हालात ऐसे हैं तो यह बेहद असंतोषजनक और मृतक के अधिकारों का उल्लंघन है।
पीठ ने पाया कि कोविड-19 के मरीजों के लिए यह शहर का सबसे बड़ा अस्पताल है और इसके शवगृह में कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों अथवा संक्रमण के संदिग्ध मरीजों के शव रखे गए हैं। पीठ ने इस पर भी गौर किया कि 26 मई को निगम बोध घाट से आठ शवों को लौटा दिया गया था क्योंकि वहां आठ सीएनजी शवदाह गृहों में से दो ही काम कर रहे थे।