अदालत ने सड़क दुर्घटना में मारे गए हरियाणा पुलिस के उप निरीक्षक अजीत सिंह के आश्रितों को 76 लाख 25 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने बीमा कंपनी के सभी तर्को को खारिज कर दिया।
रोहिणी स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायालय की न्यायाधीश एकता गाबा मान ने अपने फैसले में नेशनल बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि मुआवजे की कुल राशि में से 80 प्रतिशत राशि मृतक की विधवा शकुंतला को 20 प्रतिशत राशि उनकी पुत्री नेहा सहरावत के नाम 30 दिनों में जारी करे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शकुंतला बैंक से पैसे मात्र स्लिप के जरिए ही एक तय निश्चत राशि ही निकाल सकती है और किसी अन्य माध्यम से बैंक खाते से राशि नहीं निकाली जाएगी। याची शकुंतला, उनके 29 वर्षीय पुत्र प्रवेश कुमार व 19 वर्षीय पुत्री ने अदालत को बताया कि उनके पति अजीत सिंह हरियाणा पुलिस में बतौर उपनिरीक्षक काम करते थे। 4 दिसंबर 2017 को वे किसी काम से मच्छगरी अपनी कार से गए थे। जब वे आईएमटी बल्लभगढ़ जिला फरीदाबाद के पास पंहुचे तो तेज गति से आ रहे ट्रैक्टर ने कार को टक्कर मार दी।
इस दुर्घटना में अजीत सिंह बुरी तरह से घायल हो गए और उन्हें फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तबीयत खराब होने पर उन्हें एम्स दिल्ली स्थानांतरित किया गया, जहां उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि पेश गवाहों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि ट्रैक्टर चालक महीपाल काफी तेज गति से व लारवाही से वाहन चला रहा था। उन्होंने कहा कि मृत्यु के समय उनके पति का वेतन 74,634 रुपये मिल रहा था। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजा दिलवाया जाए।
वहीं महीपाल ने तर्क रखा कि दुर्घटना में वह घायल हो गया था, जबकि उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और ट्रैक्टर का नेशनल बीमा कंपनी से बीमा करवाया हुआ है। उसने लापरवाही से वाहन चलाने से इंकार किया। वहीं बीमा कंपनी ने भी मुआवजे का विरोध किया व तर्क रखा कि मृतक हरियाणा पुलिस का कर्मचारी था और तय नियमों के अनुसार उसे मुआवजा मिला है। अदालत ने उनके तर्को को खारिज कर याचिका को स्वीकार करते हुए मुआवजा देने का निर्देश दिया है।