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हाईकोर्ट ने पूछा क्या परीक्षा के लिए छात्रों के पास होगा एमसीक्यू का विकल्प

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नई दिल्ली। क्या अंतिम वर्ष की परीक्षा देने वाले छात्रों के पास एमसीक्यू का विकल्प होगा। यह सवाल हाईकोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से पूछा। यूजीसी ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराने का आदेश सभी विश्वविद्यालयों को दिया था। हाईकोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई 24 जुलाई के लिए सूचीबद्ध की है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने यूजीसी से पूछा कि क्या अंतिम वर्ष की परीक्षाएं बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू), असाइनमेंट और प्रस्तुतिकरण के आधार पर कराई जा सकती हैं। उन्होंने यूजीसी से अप्रैल में जारी उसके दिशानिर्देशों का महत्व भी पूछा जिनमें किसी कॉलेज द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले तरीकों का उल्लेख है।
यूजीसी ने दलील दी कि दिशानिर्देश अंतिम वर्ष के परीक्षार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन की अनुमति नहीं देते क्योंकि इससे प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न खड़ा होता है। इस परीक्षा में लंबा समय लगता है। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय ने दलील दी कि वह ऑनलाइन परीक्षाएं करवा रहा है क्योंकि यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराना अनिवार्य है।
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इस याचिका में देश के 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की दर्जनों यूनिवर्सिटी के 31 छात्रों ने यूजीसी के छह जुलाई के दिशानिदेर्शों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के परीक्षार्थियों के लिए खुली किताब आधारित परीक्षा (ओपन बुक एक्जाम) कराने के फैसले को भी चुनौती दी गई है।
इन याचिकाकर्ता छात्रों में एक कोरोना पीड़ित भी है। उनका कहना है कि ऐसे अंतिम वर्ष के कई छात्र हैं, जो या तो खुद कोरोना संक्रमण के शिकार हैं या उनके परिवार के सदस्य इस महामारी की चपेट में हैं। ऐसे छात्रों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर करना अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि संशोधित यूजीसी दिशानिर्देश मौलिक अधिकारों के उल्लंघन में हैं क्योंकि यह परीक्षार्थियों की आर्थिक, मानसिक, शारीरिक और सामाजिक दुर्दशा को ध्यान में रखने में विफल रहा है। अगर परीक्षा हुई तो छात्र एक भारी जोखिम के संपर्क में होंगे। जो छात्र लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में हैं उन्हें परीक्षा के लिए कोरोना संक्रमण के बीच जोखिम उठाकर आना होगा।
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