नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल अधिकारियों से कहा कि उच्च सुरक्षा वार्ड के कैदियों के लिए टेलिविजन लगाने पर विचार किया जाए। पीठ ने अधिकारियों से कहा कि यह एक छोटा आग्रह है। इससे तिहाड़ प्रशासन का बजट प्रभावित नहीं होगा। कैदियों के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान मानसिक अवसाद होने के आधार पर यह मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कैदी भी पीड़ा झेल रहे हैं। ये लोग कोई बड़ी चीज नहीं मांग रहे हैं। कोई कीमती सामान नहीं मांग रहे हैं, जिससे जेल का बजट प्रभावित होगा। पीठ ने दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण से कहा कि वह निर्देश प्राप्त करें और 7 अगस्त तक पीठ को बताएं।
पीठ को गौतम नारायण ने बताया कि याचिकाकर्ता दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने कैदियों को अकेले रखने की बात अपनी याचिका में की है, लेकिन किसी भी कैदी को अकेले नहीं रखा जा रहा है। डीएसजीएमसी ने इस याचिका में दावा किया कि मौजूदा कोविड-19 महामारी की स्थिति में कैदियों में अवसाद की स्थिति है।
याचिका में कहा गया कि इन कैदियों को किसी भी व्यक्ति से मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिससे इनमें अवसाद और बढ़ रहा है। याचिका में कहा गया कि कैदियों को अवसाद से बचाने और स्वस्थ रखने के लिए टीवी जैसी सुविधा अनिवार्य है।