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दिल्ली: राजधानी के स्कूलों में कितने शिक्षक सीटीईटी परीक्षा पास- दिल्ली सरकार व अग्रसेन स्कूल से जवाब तलब

Fri, 19 Mar 2021 06:42 AM IST
योगेश जोशी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता का आंकलन करने वाले सीटीईटी की परीक्षा पास करने वाले शिक्षक हैं। इतना ही नहीं अदालत ने बवाना स्थित महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल को भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके स्कूल में शिक्षक सीटीईटी परीक्षा पास हैं। अदालत ने इस मुद्दे को लेकर हटाए गए एक शिक्षक की याचिका पर यह निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव के समक्ष याची शिक्षक राजेश महेश्वरी के अधिवक्ता खगेश झा व शिखा शर्मा बग्गा ने तर्क रखा कि राजधानी के सरकार व निजी स्कूलों में 90 फीसदी के आसपास ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने सीटीईटी की परीक्षा पास नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल ने मनमाने तरीके से इसे मुद्दा बनाकर नौकरी से हटा दिया। उन्होंने कहा उनके मुवक्किल को स्कूल प्रशासन बिना कारण प्रताड़ित कर रहा था और दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल ने दो उनके मुवक्किल के हक में फैसला दिया था और अब सीटीईटी परीक्षा का बहाना बनाकर हटाया गया है जबकि उसी स्कूल के शिक्षकों ने यह परीक्षा पास नहीं की है।

अदालत ने दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालयय स्कूल, स्कूल सोसाईटी व नेशनल  काउंसिल फॉर टीचर फेडरेशन को इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई  कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई 24 मार्च तय की है।
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याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्क्लि ने स्कूल में बतौर टीजीटी शिक्षक के रूप में 21 अप्रैल 2014 को नौकरी शुरु की थी। इसके बाद उसे कम वेतन दिया जाने लगा न ही स्थाई किया। स्कूल प्रशासन ने 11 मई 2017 को उनके मुवक्किल से त्यागपत्र सहित कुछ दसतावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और उसे हटा दिया। 

उन्होंने कहा उनके मुवक्क्लि ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की और ट्रिब्यूनल ने 31 अगस्त 2020 को उनके मुवक्किल के हक में फैसला दिया व स्कूल प्रशासन को उनके मुवक्किल को नौकरी पर बहाल करने व उसे पूरा वेतन देने का निर्देश दिया। स्कूल प्रशासन ने देरी से अपील दायर की लेकिन ट्रिब्यूनल ने 13 अक्तूबर को अपील खारिज कर स्कूल प्रशासन पर दो लाख रुपये जुर्माना कर दिया।
याची ने कहा कि इसके बाद स्कूल प्रशासन ने उसे बहाल तो कर दिया लेकिन प्रताड़ित करना शुरु कर दिया। वहीं 5 फरवरी 2021 को नोटिस दिया कि वह सीटीईटी परीक्षा पास नहीं है। आखिर स्कूल

प्रशासन ने 21 शिक्षकों में से सात को नोटिस दिया व पुन: तीन को बर्खास्त कर दिया। याची के अधिवक्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति अनिल देव कमेटी ने कहा था कि निजी स्कूल फीस के नाम पर अभिभावकों को लूट रहे है वहीं वे शिक्षको को पूरा वेतन तक नहीं दे रहे। ऐसे में स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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