अस्पताल के निदेशक डॉ. एससीएल गुप्ता ने कहा, हम दो सप्ताह से ऑक्सीजन के लिए जूझ रहे हैं। कोर्ट में भी मामला चल रहा है और हर दिन वहां जानकारी भी दे रहे हैं, लेकिन यह समझना होगा कि ऑक्सीजन हमें नहीं चाहिए। हम सुबह सात बजे से फोन कर रहे थे, लेकिन समय पर टैंकर नहीं आया। बीते शुक्रवार को भी ऐसा हुआ लेकिन उस दौरान पांच हजार लीटर ऑक्सीजन हमें मिल गई थी। हमें पता था कि इससे थोड़ा वक्त आगे बढ़ाया जा सकता है। दो हजार लीटर ऑक्सीजन बचने के बाद हमनें अलर्ट जारी भी किया लेकिन जब तक टैंकर मिलता तब तक आठ मरीजों की मौत हो गई।
हम उन्हें नहीं बचा सके। इनमें से छह मरीज हाई प्रेशर की ऑक्सीजन पर आईसीयू में थे। बाद में चार मरीजों की और मौत हो गई। डॉ. गुप्ता ने कहा कि उनके यहां 80 फीसदी बेड कोविड उपचार के लिए दिल्ली सरकार ने आरक्षित किए हुए हैं। अभी अस्पताल में 326 मरीज भर्ती हैं जिनमें से 300 कोरोना संक्रमित हैं। इनमें से 230 मरीज अस्पताल में हाई प्रेशर पर हैं और 48 मरीज आईसीयू में हैं।
दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति, बेड और दवाओं की कमी को लेकर हाईकोर्ट में शनिवार को भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि पानी सिर से ऊपर चला गया है। केंद्र सरकार को आदेश देते हुए कहा कि दिल्ली को हर हाल में उसके कोटे की ऑक्सीजन दें।
केजरीवाल बोले- इतनी कम ऑक्सीजन में दिल्ली कैसे सांस ले
वहीं ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये खबर बहुत ही ज्यादा पीड़ादायी है। उन्होंने कहा कि सही समय पर ऑक्सीजन देकर इनकी जान बच सकती थी। दिल्ली को उसके कोटे की ऑक्सीजन दी जाए। अपने लोगों की इस तरह होतीं मौतें अब और नहीं देखी जाती। दिल्ली को 976 टन ऑक्सीजन चाहिए, लेकिन कल केवल 312 टन ऑक्सीजन दी गई। इतनी कम ऑक्सीजन में दिल्ली कैसे सांस ले?
हरियाणा नंबर वाले चार ऑक्सीजन टैंकर दिल्ली को करें आवंटित
हाईकोर्ट ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वे हरियाणा नंबर वाले चार ऑक्सीजन टैंकर दिल्ली को आवंटित करें। राजस्थान में हाल ही में हिरासत में लिए गए टैंकर को तुरंत रिहा करे। कोर्ट ने केंद्र को इस बारे में रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।