तिरंगा झंडा की आकृति बनाकर बच्चे भी हर घर तिरंगा अभियान के गवाह बने। मौका था राजघाट स्थित ‘गांधी दर्शन’ में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के आयोजन का। प्रतियोगिता में आए बच्चों ने तिरंगे के चित्र को उकेरा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदू, मुस्लिम समेत अन्य धर्मों के बच्चे व उनके माता-पिता ने हिस्सा लिया।
बच्चों के लिए गांधी दर्शन वाले तीनों संग्रहालय को खोल दिया गया था ताकि वे महात्मा गांधी के संदेश और क्ले मॉडल्स के माध्यम से दर्शाए गए स्वतंत्रता संग्राम को देख सके। इस दौरान बच्चों ने आकर्षक थ्रीडी डिजिटल डोम भी देखा। बच्चे अलग-अलग तरह के रंग लेकर प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे थे। जब बच्चों से पूछा गया कि ‘हर घर तिरंगा’ किसका नारा है, तब बच्चों ने एक सुर से कहा कि नरेंद्र मोदी का।
आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने सभी 14 जिलों में आजादी की गौरव यात्रा निकाली। गौरव यात्रा वजीरपुर जेजे कालोनी से शुरु होकर शंकर चौक, त्रिनगर तक निकली वहीं बाबरपुर जिले में गौरव यात्रा मेन रेड लाईट सीलमपुर चौक से गोकुलपुरी रेड लाइट तक निकाली गई।
जिला अध्यक्ष मनोज यादव और जिला अध्यक्ष जुबैर अहमद ने यात्राओं का आयोजन किया। दिल्ली के पूर्व मंत्री डॉ. नरेन्द्र नाथ ने कहा कि कांग्रेर्स आजादी की गौरव यात्रा भाजपा की मोदी सरकार और दिल्ली की अरविंद सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए निकाल रही है। कम्युनिकेशन विभाग के चैयरमेन अनिल भारद्वाज ने कहा कि स्वतंत्रता की 75 वर्षगांठ मनाने के सच्चे अधिकारी कांग्रेस के सैनिक है जिन्होंने आजादी के अंग्रेजों से लड़कर अपनी कुर्बानियां दीं।
जीबी पंत अस्पताल में निकाली गई तिरंगा यात्रा : दिल्ली सरकार के जीबी पंत अस्पताल में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर शनिवार को पैरामेडिकल टेक्निकल इंप्लायज यूनियन और एनपीएचए ने तिरंगा यात्रा निकाली।
पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर अदालतों में तिरंगा और न्याय की मूर्ति रखने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट समेत दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों के भीतर व मुख्य द्वार पर तिरंगा लगाने की मांग की है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि लोगों का न्याय पालिका में अटूट विश्वास है। लोग यहां बड़ी उम्मीद के साथ आते हैं। न्यायालयों को न्याय का मंदिर माना जाता है। न्यायिक दृष्टिकोण का सबसे महत्वपूर्ण रूप न्याय की मूर्ति है।
यह पहली ऐसी छवि है, जो कानून और न्याय जैसे शब्द का उपयोग होने पर किसी व्यक्ति के दिमाग में बनती है। लेकिन यह निराशाजनक है कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के किसी भी न्यायाधीश की बेंच पर न तो तिरंगा और न ही न्याय की मूर्ति रखी जाती है।