जीएसटी बिलों में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड नौवीं कक्षा तक पढ़ा राजकुमार दीक्षित अब तक 250 से अधिक शेल कंपनियां रजिस्टर्ड करा चुका है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी की गई हो सकती है।
फिलहाल एक कंपनी की जांच में ही 128 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन और करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का खुलासा हुआ है। अब तक पुलिस को 50 फर्जी कंपनियों का पता चल चुका है। जांच में सामने आया है कि राजकुमार ने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला दिया था।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस पूरे खेल में जीएसटी विभाग के कर्मचारी या अन्य लोग भी शामिल तो नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राजकुमार के करीबी अमर कुमार और विभाष कुमार पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे।
दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद अकाउंटेंसी और जीएसटी फाइलिंग का काम करने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजकुमार और फरार आरोपी दिलीप कुमार से हुई। इसके बाद दोनों फर्जी दस्तावेज के जरिए शेल कंपनियां बनाकर जीएसटी धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क का हिस्सा बन गए।
इतने शातिर...फर्जी कंपनियों को असली जैसा चलाते थे
आरोपियों का तरीका बेहद संगठित था। फर्जी कंपनियों के लिए स्टांप, कागजात और अन्य दस्तावेज तैयार कर उन्हें वास्तविक कारोबारी फर्म की तरह संचालित किया जाता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि अमर और विभाष ने राजकुमार के साथ मिलकर करीब 200 शेल कंपनियों का पंजीकरण कराया।
कोई शेल कंपनियां चलाता, कोई फर्जी आईटीसी दावों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता
जांच में सामने आया कि शाहदरा निवासी नितिन वर्मा शुरुआत में खुद की शेल कंपनियां चलाता था, लेकिन बाद में राजकुमार और दिलीप के नेटवर्क से जुड़ गया। वहीं पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके का रहने वाला वसीम फर्जी आईटीसी दावों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था। दूसरी ओर मीट कारोबार से जुड़ा आबिद भी बैंक खातों के जरिए नेटवर्क को सहयोग दे रहा था। पुलिस फरार अन्य मुख्य आरोपी दिलीप कुमार की तलाश में जुटी है।