गूगल-पे एप को भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है, क्यूंकि यह भुगतान प्रणाली संचालक (पीएसओ) नहीं, बल्कि यह तृतीय पक्ष एप्लीकेशन प्रदाता है। यह दलील भुगतान संबंधी विवाद के बाद हाईकोर्ट में दायर याचिका पर बुधवार को गूगल इंडिया डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड ने दी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में गूगल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से प्राधिकृत पीएसओ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) है, जो समूचे एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) नेटवर्क का मालिक एवं संचालक है।
पेश हलफनामे में कहा गया कि एनपीसीआई भुगतान सेवा प्रदाता बैंकों और गूगल-पे जैसे तृतीय पक्ष एप्लीकेशन प्रदाताओं (टीपीए) को अपने नेटवर्क पर लेन-देन के लिए अधिकृत करती है। इन दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 31 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दी।
गूगल ने यह हलफनामा उस जनहित याचिका पर पेश किया जिसमें आरोप लगाया गया था कि गूगल का मोबाइल भुगतान ऐप गूगल-पे या जी-पे भारतीय रिजर्व बैंक से आवश्यक अनुमति के बिना वित्तीय लेन-देन उपलब्ध करा रहा है। यह याचिका वित्तीय अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा की ओर से दायर की गई है।