दिल्ली की पहचान सिर्फ सत्ता के गलियारों, ऐतिहासिक इमारतों और सियासी हलचलों से नहीं बनी। इसकी सड़कों ने उन नारों को भी सुना है, जिन्होंने देशभर के आंदोलनों को आवाज दी। कभी संसद के दरवाजे पर दस्तक, कभी बोट क्लब पर किसानों का शक्ति प्रदर्शन, तो कभी जंतर-मंतर पर दिन-रात धरना।
दिल्ली में विरोध की जगहें बदलती रहीं, लेकिन अपनी मांग सत्ता तक पहुंचाने की कोशिश जारी रही। इस क्रम में सोमवार बड़ा मोड़ आया। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। यह बदलाव सिर्फ जगह बदलने की कहानी नहीं है।
जंतर-मंतर पर आठ साल बाद एक बार फिर से वहां शांति होगी...न कोई नारा...न कोई धरना और न कोई मांगों की फेहरिस्त से सजे पोस्टर और तख्तियां। इसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड में धरने जमेंगे।
अक्तूबर 2017 में भी लगी थी बंदिश
एनजीटी के आदेश पर अक्तूबर 2017 में जंतर मंतर पर प्रदर्शनों की बंदिश लग गई थी। सिविल सोसाइटी ने इसका उस वक्त विरोध किया था। इसकी फरियाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और अगले साल जुलाई 2018 में बंदिश हटा ली गई थी।
वोट क्लब से जंतर-मंतर
देश की आजादी के लिए लोगों को एकजुट करने के लिए व्यवसायियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने चांदनी चौक के आजाद पार्क, दरियागंज के पटौदी हाउस, टाउन हॉल क्लॉक टावर, फिरोज शाह कोटला, कश्मीरी गेट और जामा मस्जिद पर विरोध प्रदर्शन किए।
- आजादी के बाद सत्ता के गलियारे पर नजर रखने के लिए आंदोलन की सबसे मुफीद जगह संसद को चुना। 1966 तक यह सिलसिला चला। इसके बाद गो रक्षा की मांग को लेकर धरने ने हिंसक रूप ले लिया और आम जनता के यहां प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई।
- 1966-1980 के बीच रामलीला मैदान प्रदर्शनकारियों की सबसे पसंदीदा जगह बन गई, जबकि छोटे प्रदर्शन राजपथ के बोट क्लब का रुख करने लगे। 1980 के दौर में बोट क्लब सबसे पसंदीदा धरना स्पॉट बन चुका था। लेकिन एक प्रदर्शन के दौरान किसानों का बेहद उग्र रूप देखने को मिला।
- बड़ी संख्या में किसानों ने बैलगाड़ियों के साथ इंडिया गेट के लॉन पर एक हफ्ते तक कब्जा कर लिया था।. इसके बाद बोट क्लब पर बैन लगा। फिर, लाल किला और कभी-कभार बुराड़ी में प्रदर्शन होने लगे। 1993 के बाद जंतर-मंतर एक नए अड्डे के तौर पर अस्तित्व में आया जहां कई बड़े प्रदर्शन हुए।
रामलीला मैदान : बड़े आंदोलनों का पुराना ठिकाना
50,000 लोगों के जुटान की है क्षमता
- बुकिंग के नियमों और इसमें बदलाव करने का अधिकार एमसीडी सदन के पास है।
- कमला मार्केट, दिल्ली गेट समेत रामलीला मैदान में प्रदर्शन के दौरान आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होती है। इसका असर कनॉट प्लेस तक दिखता है।
- दिल्ली मेट्रो का नई दिल्ली स्टेशन और बसों से कनेक्टिविटी बेहतर है।
- जंतर मंतर से इसकी दूरी चार किलोमीटर है।
सीबीडी ग्राउंड : पूर्वी दिल्ली का नया विकल्प
50,000 लोगों के जुटान की है क्षमता
- कड़कड़डूमा कोर्ट के नजदीक सीबीडी ग्राउंड डीडीए के अधीन है।
- दिल्ली मेट्रो के कड़कड़डूमा कोर्ट स्टेशन के साथ बसों से कनेक्टिविटी है। मेट्रो, बस, पार्किंग और पैदल पहुंचने की सुविधा है।
- चारों तरफ से खुला होने की वजह से पुलिस को सुरक्षा बंदोबस्त में अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे।
- सीबीडी ग्राउंड जंतर मंतर से 12 से 13 किलोमीटर दूर है।
बुराड़ी ग्राउंड : बड़े जुटान की बड़ी जगह
1,00,000 लोगों के जुटान की क्षमता
- पिंक लाइन का मेट्रो स्टेशन और आउटर रिंग से चलने वाली बसों से पहुंच आसान होगी।
- बुराड़ी ग्राउंड डीडीए के अधीन आता है।
- जंतर मंतर से बुराड़ी मैदान करीब 21 किलोमीटर दूर है।
- चारों तरफ से खुला होने की वजह से पुलिस को सुरक्षा बंदोबस्त में अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे।
नए आयोजन स्थलों पर एक बार में सिर्फ एक संगठन कर सकेगा प्रदर्शन
नई दिल्ली का जंतर-मंतर सिर्फ प्रदर्शनों के लिए ही था। इसमें एक साथ कई संगठन प्रदर्शन कर सकते थे। संसद सत्र चलने के दौरान देश भर से बड़ी संख्या में संगठन यहां पहुंचते थे। जबकि तीनों नए प्रदर्शन स्थलों पर साल भर अलग-अलग तरह के सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
ऐसे में बुकिंग करवाना आसान नहीं होगा। मसलन, 29-30 दिसंबर के बीच ही रामलीला मैदान की बुकिंग हो सकती है। जबकि सीबीडी ग्राउंड के बुकिंग का संभावना रामलीला के आयोजन से दशहरा बाद ही बनती है। बुराड़ी में भी इसी तरह आयोजन चलते रहते हैं। वहीं, रामलीला मैदान की बुकिंग का एक दिन का चार्ज 50,000 रुपये है।
वहीं, 55,000 रुपये सुरक्षा राशि जमा करनी होती है। टैक्स आदि मिलाकर शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये बैठता है। सुरक्षा राशि वापस कर दी जाती है। हालांकि, अधिकतम 150 लोगों के साथ छोटा सा हिस्सा प्रदर्शन के लिए मिल सकता है।
दूसरी तरफ सीबीडी ग्राउंड में शादियों सरीखे आयोजन एक लाख से तीन लाख के बीच में होते हैं। बुराड़ी ग्राउंड का चार्ज तीन हजार से पांच हजार प्रति एकड़ के बीच होता है।
21वीं सदी में बड़े आंदोलनों का गवाह बना जंतर मंतर
2011 में अन्ना हजारे के जन लोकपाल आंदोलन ने इसे देशभर में पहचान दिलाई। पांच अप्रैल को शुरू हुए उनके अनशन ने जन लोकपाल विधेयक की मांग को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
2012 में दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और बाद में उसकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। निर्भया के नाम से पहचानी जाने वाली उस युवती के लिए न्याय की मांग करते हुए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
2017 में तमिलनाडु के किसान अपनी समस्याएं लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने 41 दिन तक धरना दिया। . 2023 में पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना देकर कार्रवाई की मांग की।
जून-जुलाई में सीजेपी के दौरान जेन जी और छात्र संगठनों ने शिक्षा से लेकर चुनाव व्यवस्था तक के मुद्दे उठाए। प्रदर्शन में जंतर-मंतर नई पीढ़ी के लिए भी अपनी बात रखने का अहम मंच बना हुआ है।
जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल हटाने के फैसले का कारोबारियों ने किया स्वागत
- कनॉट प्लेस व जनपथ के कारोबारियों ने कहा, त्योहार में बाजार हो रहा था प्रभावित
- कहा-बुराड़ी या शाहदरा में प्रदर्शन स्थल होने से बाजारों की आवाजाही रहेगी सामान्य
जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल को शाहदरा के सीबीडी ग्राउंड या बुराड़ी स्थानांतरित करने के सरकार के फैसले का कनॉट प्लेस व जनपथ के कारोबारियों ने स्वागत किया है। व्यापारियों ने कहा कि कई दिनों से प्रदर्श के चलते जंतर-मंतर और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित हो रहा था। ग्राहकों की आवाजाही घटने के साथ दुकानदारों को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा। व्यापारियों ने कहा कि प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई।
मेट्रो स्टेशन बंद होने और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंच सीमित होने से आम लोगों के साथ कारोबारियों और कर्मचारियों को भी परेशानी हुई। इसका सीधा असर बाजारों की फुटपाथ पर पड़ा। उन्होंने कहा कि नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन स्थल ऐसा होना चाहिए, जिससे आम लोगों और कारोबारियों को कम से कम परेशानी हो। बुराड़ी जैसे स्थान पर प्रदर्शन होने से प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और नई दिल्ली के बाजारों में कारोबार भी सामान्य तरीके से चलता रहेगा।
रामलीला मैदान पर व्यापारी संगठन ने जताई चिंता
नई दिल्ली ट्रेड्रर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) ने रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल बनाने पर दोबारा विचार करने की बात कही है। संगठन ने कहा कि रामलीला मैदान पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों के बेहद करीब है। ऐसे में वहां बड़े प्रदर्शन होने पर यातायात, ग्राहक आवाजाही और बाजार के कारोबार पर दोबारा असर पड़ सकता है। संगठन ने प्रदर्शन स्थल तय करते समय आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखने की मांग की है। प्रदर्शन के लिए दूर का स्थान तय होने से विरोध का अधिकार भी बना रहेगा और बाजारों की रोजमर्रा की कारोबारी गतिविधियां भी कम प्रभावित होंगी।
हाईकोर्ट ने इसी साल सितंबर में नई जगह के मांगे थे सुझाव
हाईकोर्ट ने इसी साल सितंबर में नई जगह के सुझाव मांगे थे। 17 सितंबर को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में क्षत्रिय करणी सेना की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि पूरी तरह से प्रदर्शन पर रोक कैसे लगाई जा सकती है? अगर जंतर मंतर पर अनुमति नहीं दी जा सकती तो पुलिस को दूसरा वैकल्पिक स्थान बताना चाहिए। इसके बाद 25 सितंबर को जस्टिस अमित महाजन ने बैंक यूनियनों की याचिका पर पुलिस को निर्देश दिया कि 28 से 30 सितंबर के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर के अलावा वैकल्पिक जगह की मांग पर फैसला किया जाए। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि प्रशासन को यूनियनों को कोई न कोई जगह देनी चाहिए।