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जंतर-मंतर धरना देकर मांगी गोंडी धर्म लिखने की आजादी, अभी होती है 'अन्य' में गिनती

Tue, 16 Mar 2021 05:32 AM IST
योगेश जोशी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने साल 1979 में ही कह दिया था कि गोंड हिंदू नहीं हैं - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने साल 1979 में ही कह दिया था कि गोंड हिंदू नहीं हैं। उनकी भाषा, संस्कृति, गीत-संगीत, नृत्य, रीत-रिवाज हिंदू धर्म से पृथक है। उनकी भाषा-संस्कृति गोंडी है, इसलिये उनका धर्म गोंडी है। सर्वोच्च न्यायालय के मान लेने के बावजूद देश के 1026000 लोगों को (वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आधार पर) अपना धर्म 'गोंडी' लिखने का संवैधानिक हक नहीं मिला। आज भी उनकी गिनती 'अन्य' के रूप में होती है। सोमवार को जंतर-मंतर पर रायल गोंडवाना के राष्ट्रीय अध्यक्ष फौजी किशन लाल गौड़ ने अपने समाज की पीड़ा को व्यक्त करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने सरकार से मांग की कि देश की सभी आदिवासी जनजातियों को अपना धर्म 'गोंडी' लिखने की आजादी मिले। 
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फौजी किशन लाल गौड़ ने कहा कि सरकार इस साल होने वाली जनगणना से पहले इस बात को सुनिश्चित करे और राष्ट्रीय आदिवासी व इंडीजीनस समाज को उनकी पहचान दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद हिदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन के बाद सातवां कालम 'अन्य' के लिये सुनिश्चित किया गया था। यह अन्य का कॉलम देशभर की आदिवासी जनजातियों के लिये सुनिश्चित किया गया था। 

उन्होंने कहा कि देशभर के आदिवासी अब अपने आप को अन्य नहीं कहलाना चाहते। क्योंकि उनकी गोंड़ी पहचान और समृद्ध संस्कृति है। ऐसे में देशभर के आदिवासी समुदाय के लोग यही चाहते हैं कि उनको अब अपना धर्म गोंडी लिखने का हक दिया जाए। 
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उन्होंने बताया कि भारत में अन्य के कॉलम में लगभग 800 आदिवासी जनजातियां हैं, जिनको 83 प्रकार के अलग-अलग सामुदायिक नामों से दर्ज किया गया है। साल 2011 की जनगणना के दौरान इनमें से लगभग 89 लाख लोगों ने अपना धर्म 'अन्य' बताया था। जबकि 1026000 लोगों ने अपना धर्म गोंडी लिखा था। दस सालों में इनकी संख्या अब और बढ़ चुकी है।
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