नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह उन छात्रों को सात दिन के भीतर डिजिटल डिग्री प्रदान करे, जिन्हें विदेशों में दाखिला लेने या नौकरी के लिए दस्तावेज की तत्काल आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि डिग्री हासिल करना छात्रों के लिए एक उत्सव जैसा होता है, लेकिन अब यह एक यातना जैसा बन गया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने डीयू से पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों को डिग्री न देने के मुद्दे पर डीयू प्रशासन पर नाराजगी जताई। डिजिटल डिग्री देने के लिए छात्रों से वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन मांगने के साथ ही ईमेल के जरिये छात्रों से संबंधित दस्तावेज की प्रतियां मांगने पर भी हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि जब छात्र डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुका है तो उससे ईमेल के जरिये दस्तावेज की प्रतियों क्यों मांगी जा रही हैं।
पीठ ने कहा कि छात्रों को डिग्री की बेहद आवश्यकता है, क्योंकि उन्हें विदेशों में दाखिले और नौकरियों के लिए दस्तावेज देने होंगे। डिजिटल डिग्री देने की प्रक्रिया को कठिन करने की बजाय इसे सरल किया जाए। पीठ ने डीयू प्रशासन को निर्देश दिया कि डिजिटल डिग्री देने के लिए दस्तावेज की प्रतियां ईमेल पर मांगे जाने की शर्त को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।