पर्यावरण के अनुकूल सजावट रहा आकर्षण का केंद्र, जागरूकता के साथ गणेश विसर्जन का चलेगा अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी के अवसर पर दक्षिणी दिल्ली में गाजे बाजे के साथ गणपति बप्पा बुधवार को लोगों के घर-घर विराजे। इस दौरान जोर बाग में आत्मिक, पर्यावरणीय, और समुदाय-केंद्रित उत्सव के साथ गणेश चतुर्थी शुरू हुई। इस तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत गणेश स्थापना और पूजा के साथ हुई, जिसमें सांस्कृतिक कथाकारों और भक्तों ने हिस्सा लिया। पंडाल के सजावट के साथ उसकी थीम भी देखते बन रही थी।
इस अवसर पर ज्योतिषी डॉ. जय मदान ने बताया कि इस वर्ष का उत्सव पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने वाला रहा है। परंपरागत रूप से गणेश प्रतिमाओं के नदी विसर्जन से जलाशयों में प्लास्टर, रंग और रसायनों के कारण होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए उन्होंने एक अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत भक्तों को घर पर या नियंत्रित वातावरण में प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों का उपयोग कर विसर्जन करने के लिए प्रेरित किया गया है। वह लोगों को जलाशयों के संरक्षण, पेड़ लगाने, घरेलू बगीचे विकसित करने और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, जो प्रकृति और भक्ति के बीच संतुलन को दर्शाता है।
प्लास्टिक व कृत्रिम सामग्रियों नहीं हुआ उपयोग
लोगों के लिए मुख्य आकर्षण पूरी तरह से फल और सब्जियों से तैयार पर्यावरण-अनुकूल सजावट रही। इसमें मक्का, नारियल के छिलके, ड्रैगन फ्रूट, केले, कद्दू, लौकी और अन्य प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग कर सजावट की गई, जिसमें प्लास्टिक या कृत्रिम सामग्रियों का उपयोग पूरी तरह से टाला गया। यह सजावट केवल दृश्यात्मक सुंदरता तक सीमित नहीं रही। ऐसे में 29 अगस्त को गणेश विसर्जन के बाद यह फल और सब्जियां फ्रूट सलाद के रूप में परिवर्तित होकर बच्चों और जरूरतमंदों के बीच वितरित की जाएंगी। खास बात यह है कि बप्पा की मूर्ति भी इको फ्रेंडली है, ऐसे में सजावट से लेकर मूर्ति तक यहां एक भी चीज शून्य अपव्यय के दायरे में आती है।