अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को आय से अधिक संपत्ति के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को 4 साल जेल की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश विकास ढुल्ल ने चौटाला पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 5 लाख रुपये सीबीआई को दिए जाएंगे। चौटाला पर साल 1993 से 2006 के बीच आय से अधिक संपत्ति जुटाने का दोष साबित हुआ है। चौटाला की चार संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी।
विशेष न्यायाधीश ने अपने 20 पेज के फैसले में कहा कि सभी साक्ष्यों व दस्तावेज से स्पष्ट है कि चौटाला ने अपनी पावर का इस्तेमाल कर 2,81,18, 451 रुपये की संपत्ति आय से अधिक अर्जित की है। दोषी इसका साक्ष्य नहीं दे पाया और गवाहों व दस्तावेज से सीबीआई साबित करने में सफल रही है कि उन्होंने गलत तरीके से संपत्ति अर्जित की है।
अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष ने तर्क रखा है कि उनका मुवक्किल जन्म से विकलांग है और उनकी वर्तमान में आयु 87 साल की है। वे 90 प्रतिशत विकलांग है और बिना किसी की मदद के कहीं आ-जा नहीं सकता। चौटाला को स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां हैं व उनके फेफड़े में भी इंन्फेक्शन है, जिसका इलाज चल रहा है।
सीबीआई ने की अधिकतम सजा की मांग
सीबीआई ने बचाव पक्ष के तर्कों पर आपत्ति जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला को अधिकतम सजा देने की मांग की। सीबीआई वकील ने कहा कि दोषी स्वास्थ्य का हवाला देकर सजा कम करने की मांग नहीं कर सकता। भ्रष्टाचार कम करने के लिए कानून के मुताबिक सजा होनी चाहिए। सीबीआई के वकील ने कहा, भ्रष्टाचार समाज के लिए कैंसर के समान है, भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट को ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे समाज में मिसाल दिया जा सके।
अदालत ने कहा दोनों पक्षों को सुनने के बाद उनका मानना है कि दोषी को जिन धाराओं में दोषी ठहराया गया है उनमें न्यूनतम एक वर्ष व अधिकतम 7 वर्ष कैद की सजा का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि दोषी की वृद्घ आयु, विकलांगता व बीमारियों को देखते हुए सीबीआई की अधिकतम सजा के आग्रह को स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं दोषी के आरोपों को देखते हुए उनके प्रति सहानुभूति भी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने कहा कि उनका मानना है कि दोषी को न्यायिक हित में चार वर्ष कैद की सजा प्रदान करना जरूरी है।
शक्ति भ्रष्ट करती है, पूर्ण शक्ति पूरी तरह भ्रष्ट करती है : अदालत
सजा सुनाते हुए जज ढुल्ल ने कहा कि , शक्ति भ्रष्ट करती है, पूर्ण शक्ति पूरी तरह भ्रष्ट करती है। यह कहावत इस मामले में भी लागू होती है। अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी चौटाला को चार वर्ष कैद की सजा सुनाते हुए की। अदालत ने भ्रष्ट तरीके से अर्जित चौटाला की चार संपत्तियों को जब्त करने व बकाया राशि की वसूली के लिए उन पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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आय से अधिक संपत्ति की वसूली
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्ट आचरण से अर्जित संपत्तियों को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है। अदालत ने कहा, सीबीआई व चौटाला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उनके पास वर्तमान में असोला, दिल्ली में 13 बीघा 19 विस्वा का फार्म हाउस है जिसका मूल्य 1,50,32, 908 रुपये हैं। इसी प्रकार दिल्ली के हेली रोड पर गौरी सदन में 43,02,961 रुपये मूल्य का फ्लैट है। गुड़गांव में सेक्टर-28 जनप्रतिनिधि कोऑपरेटिव हाउस सोसायटी में 50 लाख रुपये मूल्य का फ्लैट व पंचकूला स्थित मनसा देवी कांप्लेक्स में 5,23,494 रुपये का प्लाट है। चारों संपत्तियों को जब्त करने का निर्देश दिया जाता है।
अदालत ने कहा कि इन संपत्तियों की कीमत 2,48,59,363 रुपये आंकी गई है, जबकि दोषी चौटाला ने 2,81,18, 451 रुपये की संपत्ति आय से अधिक अर्जित की है। इस प्रकार 32,59,087 रुपये बकाया रहते है। अदालत ने कहा कि चौटाला के पास रोहिणी में भी एक फ्लैट था लेकिन उन्होंने अदालत से मंजूरी लेकर उसे पहले ही बेच दिया था लेकिन उनकी आय की जानकारी नहीं है। अदालत ने कहा ऐसे में शेष राशि की वसूली के लिए चौटाला पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। अदालत ने कहा कि जुर्माना राशि में से पांच लाख रुपये अभियोजन पक्ष को जांच पर खर्च के लिए प्रदान किए जाए।
संपत्तियों की जब्ती के लिए रजिस्ट्रार को सूचना का निर्देश
अदालत ने सीबीआई के एसपी, जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे संबंधित सब-रजिस्ट्रार को इस बात की जानकारी दे कि उक्त संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया गया है और अब यह एनडीएमसी व हुडा की संपत्तियां भारत सरकार की है।
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क्या है मामला
सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार चौटाला 1993 और 2006 के बीच (आय के अपने वैध स्रोत से अधिक) की संपत्ति एकत्र करने के लिए जिम्मेदार हैं। मई 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने 3.6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की थी।
चौटाला को जनवरी 2013 में जेबीटी घोटाले में भी दोषी ठहराया गया था। 2008 में चौटाला और 53 अन्य पर 1999 से 2000 तक हरियाणा में 3,206 जूनियर बेसिक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में आरोप लगाए गए थे। जनवरी 2013 में अदालत ने ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय सिंह चौटाला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दस साल के कारावास की सजा सुनाई थी। चौटाला को 3,000 से अधिक अयोग्य शिक्षकों की अवैध रूप से भर्ती करने का दोषी पाया गया था।