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दिल्लीः 700 साल में पहली बार नहीं निकले ताजिये, अदालत ने दिया था जुलूस पर पाबंदी का आदेश

Mon, 31 Aug 2020 01:27 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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पुलिस का पहरा... - फोटो : अमर उजाला
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ताजिया रखने का सिलसिला मुगलकाल से चला आ रहा है, लेकिन 700 साल में ऐसा पहली बार होगा कि मोहर्रम पर ताजिये तो रखे गए, परंतु इनके साथ निकलने वाला जुलूस नहीं निकल सका। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में मोहर्रम के जुलूस निकालने पर पाबंदी लगाई गई थी, जिसे देखते हुए लोगों ने अपने घरों में रहकर हजरत इमाम हुसैन साहब को याद किया।

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हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह शरीफ के प्रमुख कासिफ निजामी का दावा है कि 700 वर्ष में ऐसा पहली बार होगा कि ताजिये के साथ जुलूस नहीं निकल सका। उन्होंने बताया कि दरगाह से कुछ ही दूरी पर स्थित इमामबाड़ा में सबसे बड़ा फूलों का ताजिया रखा जाता है। यहां चार और ताजिये रखे जाते हैं। 10वीं मुहर्रम पर दरगाह से ताजियों के साथ छुरी और कमां का मातमी जुलूस निकलता है। नौजवान हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करके अपने बदन से लहू बहाते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इन सब पर पाबंदी लगी है। इसलिए इस बार कर्बला में सिर्फ ताजिये का फूल भेजा गया।

इंद्रलोक में उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां
हाईकोर्ट ने मोहर्रम पर ताजिये के जुलूस निकालने पर पाबंदी लगाई हुई थी। बावजूद, रविवार को इंद्रलोक समेत कई अन्य इलाकों में लोगों ने ताजिये के साथ जुलूस निकाले। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं किया। हालांकि, पुलिस ने ताजिये को कर्बला तक जाने की इजाजत नहीं दी और लोगों से वापस घरों में जाने की अपील करती नजर आई।
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मजलिस पर भी रोक
जोरबाग में शाहे-मर्दा दरगाह व अंजुमन कर्बला कमेटी के सदस्य गौहर असगर कासमी ने बताया कि हर साल मोहर्रम शुरू होते ही मजलिसें शुरू हो जाती हैं। ज्यादा जगहों पर ताजिया भी रख दिए जाते हैं। कब्रिस्तान या कर्बला ले जाकर ताजियों को दफन किया जाता है। इस मौके पर हसन हुसैन की याद में मातमी जुलूस निकाले जाते हैं। कोरोना के कारण इस बार प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी।

कर्बला से पुलिस ने किया वापस
लोदी कॉलोनी स्थित दरगाह शाहे मर्दा पर इबादत के लिए पहुंचे लोगों को पुलिस ने कर्बला गेट के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी। इस रोक को लेकर मातम मनाने वाले लोगों में थोड़ी नाराजगी जरूर दिखी, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए प्रशासन के फैसले का उन्होंनेे स्वागत किया।

जामा मस्जिद इलाके में रहा कड़ा पहरा
मोहर्रम के जुलूस को लेकर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। हर बार की अपेक्षा इस बार ज्यादा सख्ती की गई। जामा मस्जिद इलाके के सभी छोटे-बड़े चौराहों पर पुलिस तैनात रही और बैरीकेडिंग लगाकर चेकिंग की गई। इस दौरान कुछ जगहों पर लोग ने जुलूस निकालने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर वापस भेज दिया।

फ्लैग मार्च निकाला
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान लोगों से सहयोग की अपील की गई। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के साथ-साथ केंद्रीय बल की भी तैनाती गई थी। स्थानीय पुलिस भी लगातार क्षेत्र में गश्त करती नजर आई। पुलिस ने सभी मस्जिदों के मौलवियों ने सहयोग देने की भी अपील की थी।

कोरोना खत्म होने की मांगी दुआ
इस दफा मोहर्रम पर घरों में ही लोगों ने मातम मनाया। शाहीन बाग में भी लोगों ने कर्बला की याद में मातम मनाकर शारीरिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया। इस मौके पर अल्लाह से इबादत में कोरोना जल्द खत्म होने की दुआ मांगी।

ताजिया निकालने पर नरेला में मुकदमा दर्ज
नरेला के बवाना इलाके में पाबंदी के बाद भी ताजिया निकालने को लेकर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि 25 से 30 लोग एक साथ एकत्र होकर ताजिये का जुलूस लेकर स्थानीय कर्बला की ओर जा रहे थे। इस दौरान किसी भी शख्स ने मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रखा था। पुलिस ने सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में नरेला इंडस्ट्रीयल थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ईश सिंघल ने बताया कि मोहर्रम को लेकर हर जगह सरकारी आदेशों का पालन करवाकर ताजिये के जुलूस निकालने पर पाबंदी थी।

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