नई दिल्ली। राजधानी में पहले 100 कंटेनमेंट जोन बनने में 65 दिन लगे थे, लेकिन अब 30 दिन में ही 600 से ज्यादा जोन बन गए हैं। तीन सप्ताह से कोरोना संक्रमण के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इससे रेड जोन की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ इन इलाकों में संक्रमण से बचाव के लिए सभी सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराने की भी जरूरत है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस समय कुल कंटेनमेंट जोन 1,114 हैं, जो सात अगस्त को 477 थे। लिहाजा 30 दिन में ही 637 रेड जोन बन गए हैं। अब जहां भी संक्रमण के मरीज मिल रहे हैं, उसके आसपास के दो से तीन घरों को कंटनेमेंट जोन घोषित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कंटेनमेंट जोन की बेहतर निगरानी करने के लिए माइक्रो स्तर पर जोन का निर्माण किया जा रहा है।
एक अधिकारी का यह भी कहना है कि अब संक्रमण के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए 14 दिन में जैसे ही किसी इलाके को डी-कंटनेे करने का समय आता है, वहां से कोई और संक्रमित मरीज मिल जाता है। कंटेनमेंट जोन की संख्या लगातार बढ़ने का यह भी एक कारण है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग प्रशासन के साथ मिलकर सख्ती से नियमों का पालन करा रहा है।
संक्रमण पर रोक लगाने की बेहतर रणनीति है कंटेनमेंट जोन
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार बताते हैं कि संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए कंटेनमेंट जोन बनाने की रणनीति काफी कारगर है, लेकिन लगातार इनकी संख्या बढ़ना एक चिंता का विषय है, इसलिए यह जरूरी है कि रेड जोन में रहने वाले लोग सभी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करें। प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि जहां भी संक्रमण के मरीज मिलें, उसके आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह सील रखे और 14 दिन तक कोई गतिविधियां न हो। ऐसा करने से इन इलाकों में संक्रमण के फैलाव को कम किया जा सकता है और दैनिक मामलों में कमी लाई जा सकती है।
ऐसे बढ़े कंटेनमेंट जोन
तारीख संख्या
7 अगस्त 477
11 अगस्त 493
15 अगस्त 538
19 अगस्त 560
23 अगस्त 627
27 अगस्त 734
31 अगस्त 833
4 सितंबर 949
7 सितंबर 1114
नोट - सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं और सात सितंबर तक के हैं