मुंडका में शुक्रवार शाम तपती गर्मी के बीच आग कहर बनकर बरसी। धुएं के गुबार में फंसे लोग जीवन बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, लेकिन किसी को कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। उधर, मौत हर किसी का पीछा कर रही थी। कई खुशकिस्मत लोगों ने मौत को चकमा भी दिया और सही सलामत बाहर आ गए, परंतु कुछ बदनसीब ऐसे भी थे जो खुद का जीवन नहीं बचा पाए। हालात इतने भयावह थे कि आसपास के लोग मंजर देखकर बेहाल थे। चीख-पुकार सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो रहे थे...
मुंडका में आग में घायलों को 11 किलोमीटर दूर तक एंबुलेंस लेकर पहुंची। किसी में दो तो किसी में तीन-तीन घायलों को लेकर चार कैट्स एंबुलेंस अलग-अलग अस्पतालों में गईं। दो अस्पतालों में 12 गंभीर रूप से घायलों को भर्ती कराया गया है, जहां देर रात तक सभी का उपचार जारी रहा।
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घटना स्थल से करीब 11.40 किलोमीटर दूर रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में घायलों को भर्ती कराया। वहीं, कुछ एंबुलेंस घायलों को लेकर संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। यहां इमरजेंसी वार्ड में एक के बाद एक कई घायलों के पहुंचते ही हड़कंप मच गया।
आनन-फानन घर के लिए रवाना हुए डॉक्टर वापस अस्पताल लौटे और उन्होंने उपचार शुरू किया। कैट्स एंबुलेंस के चालाक विनोद ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने कुछ देर बाद आग की स्थिति देखी तो वे तुरंत पूरी घटना समझ गए। इससे पहले अर्पित होटल आग की घटना में भी वे मौजूद थे। इसलिए उन्होंने तत्काल अपने आसपास मौजूद दूसरे एंबुलेंस चालकों को फोन किया और शाम छह बजे तक मौके पर चार एंबुलेंस पहुंच गईं।
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महिलाओं के साथ बच्चे भी शामिल
घटना स्थल से काफी लोगों को अस्पताल लाया गया था लेकिन हर किसी को इलाज की जरूरत नहीं थी। कुछ लोग मामूली रूप से घायल थे तो कुछ सदमे में थे। घायलों में महिलाओं के साथ बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, इनमें से एक या दो ही मामले झुलसने से जुड़े हैं। कई ऐसे भी हैं जो अभी सदमे में है। वे कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं है।