द्वारका जिला की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने फर्जी कागजात के जरिए बैंक से कार फाइनेंस करवाकर उसे बाद में बेचने वाले एक गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसमें एक मैकेनिकल इंजीनियर और एक विदेश से एबीए की पढ़ाई कर चुका है। इंजीनियर गुरुग्राम के मारुति प्लांट में काम कर चुका है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 20 कारें और चार स्कूटी बरामद की है। इसके अलावे पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी कागजात बनाने में इस्तेमाल लैपटॉप, प्रिंटर, कार मालिक की ओर से जारी बिक्री पत्र, फर्जी बैंक एनओसी और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से छह मामले सुलझाने का दावा किया है।
जिला पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने बताया कि 12 दिसंबर 2020 को मोहन गार्डन निवासी नवीन कुमार ने अपने किराएदार मोहम्मद सैजी अमानत में ख्यानत का मामला दर्ज करवाया। शिकायत में नवीन ने बताया कि सैजी टूर एंड ट्रैवल का कारोबार करता है। उसने फायदा की बात कहकर उसे भी धंधे से जुडने के लिए कहा और तीन गाडिय़ां खरीद ली। एक गाड़ी उसने नवीन को दे दिया जबकि दो को यह कहकर कंपनी में चलाने लगा कि उससे फायदा हो रहा है। लेकिन उसने गाडिय़ों से होने वाले आमदनी को कभी भी नवीन के हवाले नहीं किया। जब नवीन ने उसपर दवाब बनाया तो वह उसका घर खाली कर गायब हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने जांच शुरू की।
9 अप्रैल को पुलिस ने मोहम्मद सैजी को गिरफ्तार कर लिया। सैजी ने पूछताछ में बताया कि वह गाडिय़ों की खरीद बिक्री का काम करता है। इस काम में उसके साथी हेमंत, प्रवेश, अमित और अरुण हैं। लॉकडाउन की वजह से उन्हें कारोबार में काफी घाटा हुआ था। उसके बाद उसने अमित के साथ फर्जी कागजात से बैंकों से लोन लेकर गाड़ी खरीदने की साजिश रची। उसने नवीन को अपने कारोबार से जोड़कर उसके खरीदे गए वाहन को हड़पने की योजना बनाई। उसके बाद उनलोगों ने नवीन के फर्जी कागजात बनाकर बैंक से तीन कारें खरीद ली। इस दौरान सैजी ने बैंकों के जाली एनओसी तैयार की और हेमंत के माध्यम से परिवहन प्राधिकरण के दस्तावेजों में लिखित बैंक ऋण को निकाल दिया गया। उसके बाद आरोपियों ने दो वाहनों को बेच दिया। पुलिस ने उसके निशानदेही पर पुरानी कार की खरीद बिक्री करने वाले परविंदर सिंह और हेमंत को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके बाद प्रवेश, अमित और अरुण को गिरफ्तार कर लिया।
मुख्य आरोपी कई बैंकों से ले चुका है करोड़ों का ऋण
जांच में पुलिस को पता चला कि इंद्रलोक का रहने वाला मुख्य आरोपी मोहम्मद सैजी कई बैंक से करोड़ो का लोन ले चुका है। उसका कई बदमाशों के साथ संबंध हैं। वह देश में कई जगहों पर लोगों को फर्जी कागजात के जरिए गाड़ी बेचकर ठगी कर चुका है। वहीं त्रिनगर का रहने वाला हेमंत टूट एंड ट्रैवल कंपनी में ड्राइवर था। मोहम्मद सैजी और ट्रांसपोर्ट आथिर्रिटी के कमीशन एजेंट दीपक के संपर्क में आकर ठगी को अंजाम देने लगा। विरेंद्र नगर निवासी परविंदर सिंह पहले प्रॉपर्टी डीलर था और बाद में पुराने कार की खरीद बिक्री करने लगा। अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ठगी का धंधा करने लगा। वहीं कांगनहेड़ी का रहने वाला प्रवेश मैकेनिकल इंजीनियर है। वह हेमंत के जरिए परविंदर से मिला और पुराने कार की खरीद बिक्री करने लगा।
छावला का रहने वाला अरुण सीसीटीवी कैमरों का काम करता था, लेकिन प्रवेश के संपर्क में आने के बाद जल्द पैसा कमाने के लिए ठगी का धंधा करने लगा। वहीं असोला फतेहपुरबेरी का रहने वाला अमित विदेश से एबीए की पढ़ाई कर आया है। उसने 2018 में उसने खुद को रोहित अग्रवाल बताकर 38 लाख की एक इंडीवर कार खरीदी थी। उसने बेचने में इन आरोपियों ने उसकी मदद की थी। उसके बाद से वह इनके साथ ही काम कर रहा था। खासकर बैंक से फर्जी कागजात पर कार फाइनेंस करवाने में मदद करता था।