दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में अंतिम वर्ष के विद्यार्थी प्रयोगशाला, प्रैक्टिकल, लाइब्रेरी व उससे संबंधित गतिविधियों के लिए कॉलेज आ सकेंगे। वहीं शोधार्थी अपने संबंधित पर्यवेक्षक की सहमति से अपना शैक्षणिक कार्य जारी रख सकते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में अंतिम वर्ष के विद्यार्थी प्रयोगशाला, प्रैक्टिकल, लाइब्रेरी व उससे संबंधित गतिविधियों के लिए कॉलेज आ सकेंगे। वहीं शोधार्थी अपने संबंधित पर्यवेक्षक की सहमति से अपना शैक्षणिक कार्य जारी रख सकते हैं। कॉलेजों, विभागों में टीचिंग लर्निंग गतिविधियां ऑनलाइन मोड में ही चलेंगी। इस माह की शुरुआत में प्रशासन ने जरूरत विद्यार्थियों को कैंपस नहीं आने की सलाह दी थी।
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद शनिवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आए आदेश के अनुसार डीयू ने कॉलेजों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कॉलेजों को इन दिशा-निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन करने को कहा है। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कॉलेजों को छोटे-छोटे ग्रुप में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को कॉलेज लैब में प्रैक्टिकल करने व लाइब्रेरी का उपयोग करने के लिए बुलाया जा सकता है। इस दौरान कॉलेजों को कोरोना से बचाव की सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
इसके साथ ही यह फैसला किया गया है कि प्रशासनिक कार्यों के लिए केवल 50 फीसदी स्टाफ ही बुलाया जा सकता है। बाकी के 50 फीसदी स्टाफ को घर से ही काम करना होगा। वहीं अन्य जरूरी सेवाएं बिना बाधा के प्रिंसिपल की अनुमति से चलती रहेंगी। कंटेनमेंट जोन में रहने वाले स्टाफ को सूचना देनी होगी और छुट्टी की अनुमति लेनी होगी।
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मालूम हो कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने बीते दो अप्रैल को अगले दस दिनों तक विद्यार्थियों को कॉलेज विभाग आदि जगहों पर न आने की सलाह दी थी। छात्रों को कहा गया था कि वह घर और हॉस्टल में ही रहें और जरूरी होने पर ही कॉलेज व कैंपस आएं। प्रशासन ने कॉलेजों को कहा था कि दस दिन माह इस फैसले की समीक्षा की जाएगी और फिर आगे आदेश दिए जाएंगे। जिसके बाद कॉलेजों ने प्रैक्टिकल कक्षाएं व अन्य गतिविधियों को रोक दिया था।
अब समीक्षा के बाद अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को आने की अनुमति दी गई है। हालांकि कुछ शिक्षक इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोरोना केमामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्टीफंस कॉलेज में तो काफी विद्यार्थी कोरोना संक्रमित भी पाए गए हैं।