चिड़ियाघर में शनिवार को बीते नौ दिनों से गंभीर संक्रमण से जूझ रही मादा बबून मर गई। अफ्रीकी बबून की बीते 10 सितंबर से तबीयत खराब थी। दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक रमेश पांडेय ने बताया कि बबून का सबसे अच्छा इलाज किया गया। उसकी हालत पर चौबीसों घंटे नजर रखी गई।
उन्होंने कहा कि बबून का विसरा जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजा गया है। इससे पहले इसी महीने आठ सितंबर को भी एक मादा बबून मर गई थी। चिड़ियाघर में अब सिर्फ तीन बबून ही हैं।
रमेश पांडेय ने बताया कि 11 साल के सुंदरम (शेर) की तबियत पूरी तरीके से ठीक नहीं हुई हैं। सुंदरम को 23 अगस्त को नर्वस सिस्टम में इन्फेक्शन से लकवा मार गया था।
उसकी देखभाल और इलाज चिड़िया घर के ही पशु चिकित्सालय में किया गया। इटावा लायन सफारी और आईवीआरआई, बरेली के चिकित्सा विशेषज्ञों से उसके इलाज पर सलाह ली जा रही है। सुंदरम ने काफी तेजी से रिकवर करते हुए चलने लगा है।
पांडे ने यह भी बताया कि पिछले छह महीनों में चिड़ियाघर में जानवरों की मृत्यु दर में लगभग 45 प्रतिशत की कमी आई है। चिड़ियाघर की कुल आबादी भी पहले से बढ़ गई है। कई जानवरों जैसे पाइथन, सांभर, हिरण, काले हिरण और चिड़ियों की कई प्रजातियों में नए जीवों ने जन्म लिया है।