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धर्मांतरण प्रकरण : फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट ने नहीं लिया विदेश से रुपया, संस्था के लोगों का दावा

Thu, 24 Jun 2021 05:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • जामिया से धर्मांतरण के मामले में दो मौलानाओं की गिरफ्तारी का मामला
  • छोटे-मोटे खर्चो के लिए भारत में रहने वाले लोग ही ट्रस्ट को दान करते हैं पैसा, उसका भी होता है ऑडिट 
  • इस्लामिक दावा सेंटर से जुड़े करीबियों का कहना है कि उमर गौतम के खिलाफ नहीं मिलेंगे पुलिस को सबूत
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विस्तार
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इस्लामिक दावाह सेंटर या उससे जुड़े फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट ने किसी विदेशी से एक भी पाई नहीं ली। ट्रस्ट के पास जो भी पैसा आता है, वह सभी देश में रहने वाले लोग ही देते हैं और इसके भी एक-एक रुपये का हिसाब ऑडिट के जरिये सरकार को दिया जाता है। यह दावा सेंटर से जुड़े करीबी लोगों ने किया है। 

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लोगों का कहना था कि धर्म का काम समझकर लोग स्वच्छा से दावाह सेंटर में अपनी सेवाएं देते हैं। यहां तक कि कोई इसके लिए सैलरी भी नहीं लेता है। सेंटर से जुड़े एक करीबी ने बताया कि शनिवार को यूपी पुलिस की टीम यहां से कई फाइलें उठाकर जांच के लिए अपने साथ ले गई थीं। इन फाइलों में अपनी मर्जी से धर्म बदलने वाले लोगों का रिकॉर्ड और उनके हलफनामे हैं। 

धर्म बदलने वाले बकायदा कोर्ट से हलफनामा लेने के बाद दैनिक अखबार में इसकी सूचना देकर उसे नेशनल गजट में निकलवाते हैं। करीबियों ने दावा किया है कि पुलिस ने मौलाना को जल्दबाजी दिखाकर गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन उनके खिलाफ अदालत में सबूत पेश करना मुश्किल होंगे।
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इस्लामिक दावाह सेंटर से जुड़े एक शख्स ने बताया कि मौलाना उमर ने धर्म बदलने वाले लोगों की मदद के लिए 2010 में दावाह सेंटर का निर्माण किया था। वर्ष 2011 में नूंह मस्जिद के पास 50 गज के एक प्लॉट का निर्माण करवाकर भूतल पर इसका दफ्तर बनवाया गया। दो कमरों के दफ्तर में लोग स्वच्छा काम करते हैं। देशभर से लोग उनकी मदद के लिए आते हैं। 

धर्म बदलने वाले लोगों की कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उनकी इस्लाम सीखने में भी मदद की जाती है। दावाह सेंटर के निर्माण के कुछ ही दिनों बाद मौलाना उमर गौतम ने फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से एक संस्था कायम की। अपने कार्यक्रम के दौरान मौलाना विदेशियों से संस्था को दान न लेने की बात करते थे। कभी भी उनके ट्रस्ट ने किसी विदेशी से किसी भी तरह कोई फंड नहीं लिया। 

वहीं स्थानीय लोग भी मौलाना उमर के समर्थन में आ गए। मस्जिद नूह के इमाम ने बताया कि वह करीब 20 सालों से मौलाना उमर को जानते हैं। मौलाना पर लगे सारे आरोप बेबुनियाद हैं। इस्लाम में किसी को लालच या जबरदस्ती धर्म नहीं स्वीकार कराया जा सकता। मौलाना उमर ने भी कभी ऐसा नहीं किया।

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