कृषि कानूनों का विरोध करते किसान
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टीकरी बॉर्डर पर किसानों ने कहा है कि उनका आंदोलन अभी लंबा चलेगा। ऐसे में उनके वालंटियर आस-पास के गरीब बच्चों को खाली समय में पढ़ाया करेंगे। सोमवार को आंदोलन स्थल पर घूम रहे बच्चों को बुलाकर किताबें और कॉपियां दी गईं। कुछ समय तक इन्हें यहां पर पढ़ाया भी गया।
टीकरी बॉर्डर पर किसान नेता अनूप सिंह चानौत ने कहा कि किसानों की जीत में अभी समय है। सरकार इतनी आसानी से किसानों की बात नहीं मानेगी, आंदलनरत किसान इस बात से वाकिफ हैं। ऐसे में किसान आंदोलन आयोजन समिति ने बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया है। बच्चों के लिये पर्याप्त किताबों का प्रबंध किया जा रहा है।
किसान सोशल आर्मी बच्चों को पढ़ाने के लिए टेंट का प्रबंध करने में भी जुट गई है। सोमवार को किसान आंदोलन का 82वां दिन था। अनूप सिंह चानौत ने कहा कि गरीब तबके के यह बच्चे दिनभर आंदोलन में ही इधर से उधर भटकते रहते हैं। जबतक यह आंदोलन चलेगा यह बच्चे आगे भी ऐसे ही घूमते रहेंगे। बातचीत करने पर यह बच्चे पैसा और किताबें नहीं होने की बात करते हैं। इसलिये इन बच्चों को अब यहीं पर पढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ज्यादा रही
टीकरी बॉर्डर पर सोमवार को किसानों की संख्या बढ़ी नजर आई। यहां पर महिलाओं और बच्चों की भागीदारी भी ज्यादा रही। महिलाओं ने हरियाणवी गीतों के माध्यम से लोगों में जोश भरने का काम किया। वहीं छोटे बच्चों ने भी कविता और कहानियो की मनमोहक प्रस्तुति दी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सरकार उनके आंदोलन के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी दबाने का प्रयास कर रही है। लेकिन उनका आंदोलन लगातार और ज्यादा मजबूत और जन जन का आंदोलन बनता जा रहा है। किसान पीछे नहीं हटेंगे बल्कि अपने आंदोलन को लगातार मजबूत करने के इरादे से तेज काम करेंगे। यह आंदोलन अब कब खत्म होगा यह कह पाना किसी के लिये आसान नहीं है।
सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को अपने नाक की लड़ाई बना लिया है, जबकि चाहिए था कि सरकार वैसा करे जैसा जनता चाहे। लेकिन सरकार मनमाने तरीके से तीन काले कानून किसानों पर लादना चाहती है। जिससे किसानों का अस्तित्व ही मिट जाएगा। इन कानूनों से केवल पूंजीपति ही रह जाएंगे। अब किसानों ने आगे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सोमवार को टीकरी बॉर्डर पर किसान नेताओं ने अपने रेल रोको अभियान को लेकर बैठक की।