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धरने का बना रिकॉर्ड: किसानों ने काला झंडा लहराकर और पुतला जलाकर जताया विरोध, मांगें अब भी जस की तस

Thu, 27 May 2021 02:09 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/सोनीपत

सार

सिंघु बॉर्डर पर भी सैकड़ों किसानों ने काले झंडे दिखाकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। यहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का करीब 10 फुट ऊंचा पुतला जलाया गया।
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किसानों ने फूंका केंद्र सरकार का पूतला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान छह महीने से दिल्ली के सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे मांगें पूरी होने के बाद ही लौटेंगे। किसानों ने सबसे लंबे समय तक चलने वाले धरने का रिकार्ड बना दिया है। सरकार से कई चरणों की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है।

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बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार के सात साल पूरे हो गए। संयुक्त किसान मोर्चा की अपील पर किसानों ने इस मौके को काले दिवस के रूप में मनाया। तीनों धरना स्थलों पर सरकार के खिलाफ काले झंडे लहराए गए और सरकार के पुतले फूंके गए। मोर्चा ने भगवान बुद्ध का जन्म, निर्वाण और परिनिर्वाण का उत्सव बुद्ध पूर्णिमा भी मनाया।

आंदोलनकारी किसानों ने काले बिल्ले व कपड़े पहनकर सिंघु बॉर्डर के आसपास बाइक रैली निकाली। किसानों ने अपने घरों, वाहनों व ट्रैक्टरों पर काले झंडे लगाए। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन सहित आंदोलन से जुड़े अनेक संगठनों ने काला दिवस मनाया।
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संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़ के अनुसार कुंडली बॉर्डर के मुख्य मंच पर बुधवार को सबसे पहले बुद्ध पूर्णिमा मनाई गई और महात्मा बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद किसानों ने अपने वाहनों व ट्रैक्टर-ट्रॉली पर काले झंडे लगाए और काले झंडे लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर पार्कर मॉल के पास हाईवे के अलावा किसान मोर्चा के अस्थायी कार्यालय व मुख्य मंच के पास किसानों ने प्रदर्शन करके केंद्र सरकार का पुतला फूंका। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने का खूब प्रयास कर रही है, लेकिन किसान का हौसला टूटने वाला नहीं है और कृषि कानून रद्द होने के बाद ही किसान यहां से वापस जाएंगे।
 
टिकैत ने की शांति की अपील

गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने काले झंडे लहराए और पुतला जलाया। इस मौके पर टिकैत ने कहा कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने होंगे। देशभर में सरकार के खिलाफ किसान और मजदूर काले झंडे लहरा रहे हैं और पुतला जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान लोगों से शांतिपूर्वक विरोध करने की अपील की गई है। किसान नेता पुरषोत्तम उदत ने कहा कि सरकार ने सात सालों में किसानों और मजदूरों के खिलाफ फैसले किए। किसानों के लिए सरकार का सात साल का कार्यकाल काला ही रहा है। इसलिए किसानों ने इस मौके को काला दिवस के रूप में मनाया है। 

देश के अधिकतर राज्यों में काला दिवस मनाए जाने का दावा
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के खिलाफ बुधवार को काला दिवस देश के अधिकतर राज्यों में मनाया गया है। उनके अनुसार हरियाणा, पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बंगाल, जम्मू कश्मीर, असम आदि में अधिकतर जगहों पर लोगों ने अपने घरों पर काले झंडे लगाए और पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका।

दिल्ली की सीमा में दाखिल होने की कोशिश नहीं की
किसानों ने बुधवार को धरना स्थलों पर काला झंडा लहराया, पुतला जलाया लेकिन उन्होंने दिल्ली की सीमा के अंदर दाखिल होने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि वह शुरू से शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। लेकिन दिल्ली में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए टीकरी, सिंघु और गाजीपुर धरना स्थलों पर दिल्ली पुलिस और दूसरे सुरक्षा बल तैनात थे।

भारतीय किसान यूनियन के नेता जोगिंदर घासीराम नैन ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने शांतिपूर्ण तरीके से काला दिवस मनाने की योजना तय की थी। दिल्ली के अंदर किसानों के प्रवेश करने की पहले से ही कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि किसान अब भी तीन कृषि कानूनों को वापस कराने के मुद्दे पर एकजुट हैं। मौजूदा केंद्र सरकार के सात साल पूरे होने के मौके पर किसानों ने उसका विरोध करने की योजना तय की थी। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि दिल्ली समेत देशभर में किसानों और मजदूरों के अलावा आम नागरिकों ने भी काला दिवस का समर्थन किया है।

टीकरी बॉर्डर धरना स्थल पर एक तरफ किसान और दूसरी तरफ सुरक्षा बल अब भी डटे हुए हैं। वहीं इनके अलावा आसपास के क्षेत्र में कोरोना महामारी का असर साफ नजर आ रहा है। लॉकडाउन में शहर के बाकी हिस्सों की तरह पंजाबी बाग से टीकरी बॉर्डर सड़क के दोनों तरफ दुकानें बंद हैं।

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