अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को कोरोना संक्रमण का डर नहीं है। वैक्सीनेशन के दूसरे चरण की शुरुआत पर किसानों ने विरोध जताते हुए इसकी जरूरत होने से ही इनकार कर दिया है। वरिष्ठ नागरिकों या पहले से किसी बीमारी से घिरे 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीके लगाए जा रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी किसान नेताओं का कहना है कि किसी भी किसान को टीका लगाने से नहीं रोकेंगे, क्योंकि यह एक व्यक्तिगत विकल्प है।
अपनी मांगों के समर्थन में सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर तीन महीने से भी अधिक समय से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान डटे हुए हैं। 80 वर्षीय किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि वैक्सीन लगवाने के लिए टीकाकरण केंद्र पर नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना को हमने मार दिया है, इसलिए वैक्सीन लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि खेतों में किसान कड़ी मेहनत करते हैं, इसलिए रोग से लड़ने की क्षमता अधिक है।
75 वर्षीय किसान नेता जोगिंदर सिंह ने कहा बीमारी से लड़ने के लिए वैक्सीन के नाम पर किसानों की लड़ाई कमजोर नहीं होगी। मैं टीका लगवाने का इच्छुक नहीं हूं, लेकिन किसी को इससे मना नहीं करेंगे।
गाजीपुर सीमा पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि अगर स्थानीय प्रशासन की ओर से किसानों के लिए इंतजाम किए जाते हैं तो टिकैत को टीकाकरण करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
संयुक्त किसान मोर्चा के 70 वर्षीय कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि हम कोरोना वायरस से डरते नहीं हैं। हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोरोनो का एक भी मामले का पता नहीं चला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स में वैक्सीन लेने के बाद सभी लोगों से भी टीका लगवाने की अपील की है। 16 जनवरी से शुरू हुए वैक्सीनेशन के पहले चरण के तहत दिल्ली में 3.6 लाख से अधिक लाभार्थियों को शामिल किया गया। सोमवार से वैक्सीनेशन के दूसरे चरण की शुरुआत की गई है।