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कोरोना का एक सालः संघर्ष के साथ दिल्ली ने महामारी से जीती जंग

Tue, 02 Mar 2021 02:52 AM IST
Vikas Kumar अभिषेक पांचाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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कोरोना की तीन लहर देख चुकी दिल्ली में अब संक्रमण दम तोड़ रहा है। 98 फीसदी से ज्यादा लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। साथ ही मौत के आंकड़ों में भी लगातार कमी आ रही है। बीते एक साल में इस महामारी के कारण राजधानी में कई ऐसे कार्य हुए, जो दिल्ली समेत देश के लिए मील का पत्थर शामिल हुए। इनमें दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल ने सबसे अधिक मरीजों का इलाज करके रिकॉर्ड बनाया। दिल्ली ने ही देश को होम आईसोलेशन का मॉडल दिया। यहां के डॉक्टरों ने भी मरीजों के इलाज के लिए सालभर मेहनत की। संक्रमण काल में  दिल्ली ने बहुत कुछ पाने के साथ कुछ खोया भी। संक्रमण की चपेट में आने से 10 हजार लोगों ने जान गंवाई। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के चलते कई लोगों का काम धंधा भी बंद हुआ। हालांकि, अब एक साल पर चीजे पटरी पर आ रही है। लोगों को उम्मीद है कि अब दोबारा वो दौर उन्हें न देखना पड़े।

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तीन मामले मील का पत्थर साबित हुए
1. देश में सबसे ज्यादा मरीज लोकनायक में हुए स्वस्थ
दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल को कोरोना काल में कोविड विशेष घोषित किया गया था। ढाई हजार बेड कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए आरक्षित रखे गए थे। महामारी के दौर में अस्पताल ने कई कीर्तिमान स्थापित किए। लोकनायक देश में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों का इलाज करने वाला अस्पताल बना। 

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुरेश कुमार बताते हैं कि एक साल में यहां  15,654 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें से करीब 12 हजार मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। यह एक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि महामारी के दौर में अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी मेहनत के साथ काम किया है। दिन के 18 घंटे तक पीपीई किट पहनकर स्वास्थ्य कर्मी मरीजों के इलाज में लगे रहते थे। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में अस्पताल में करीब 600 कोविड संक्रमित महिलाओं की सफल डिलीवरी की गई। साथ ही 2 हजार मरीजों का डायललिसिस भी किया गया। डॉक्टर सुरेश के मुताबिक, कोरोना टीकाकरण अभियान में भी यहां के स्वास्थ्य कर्मचारियों ने काफी काम किया है। यहां तीन केंद्र में टीकाकरण चल रहा है। इनमें से एक केंद्र पर 24 घंटे टीका लगाया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन हो सके। उन्होंने बताया कि एलएनजेपी ऐसा पहला अस्पताल है, जहां 24 घंटे टीकाकरण चलाया जा रहा है। 
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2. दिल्ली ने देश को दिया होम आईसोलेशन मॉडल
देश में सबसे पहले दिल्ली में ही होम आईसोलेशन की सुविधा दी गई। इसके तहत हल्के लक्षण वाले सभी मरीजों का उनके घर पर ही इलाज किया गया। मरीजों को आक्सी मीटर दिए गए। डॉक्टरों की टीम ने समय-समय पर घर जाकर रोगियों का स्वास्थ्य जांचा। जिन मरीजों को स्वास्थ्य समस्या आती थी। उनको तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। सरकार के इस मॉडल से अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी। इससे संक्रमण के गंभीर लक्षण वाले रोगियों को बेहतर इलाज मिला। दिल्ली में महामारी पर लगाम लगाने के लिए यह मॉडल सबसे अहम साबित हुआ।

3. अस्पतालों में बढ़ा बुनियादी ढांचा 
सरकार ने अस्पतालों में 3 हजार से ज्यादा आईसीयू और करीब एक हजार वेंटिलेटर बेड बढ़ाए गए। एंबुलेंस की संख्या भी बढ़ाकर तीन गुना की गई। अस्पतालों के निरीक्षण के लिए विशेष समिति का गठन किया गया। समिति ने अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के विषय में सभी जानकारी ली और इसकी रिपोर्ट सरकार को दी। इससे सभी जरूरी सुविधाओं को दुरूस्त किया गया।

डॉक्टर ने पेश की मिसाल
कोरोना काल में डॉक्टरों ने पहली पंक्ति में खड़े रहकर मरीजों की सेवा की है। परिवार की परवाह किए बिना स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहे। इन्ही में से एक हैं डॉक्टर अजीत जैन, जो मार्च में संक्रमण की शुरूआत के छह महीने बाद अपने घर गए थे।

डॉक्टर अजीत जैन ताहिरपुर के राजीव गांधी सुपरस्पेशयलिटी अस्पताल में कोविड नोडल अधिकारी है। अस्पताल में कोरोना मरीजों से जुड़े सभी विभाग उन्हीं कि देखरेख में हैं। कोरोना की शुरूआत के बाद से से ही वह मरीजों के इलाज में जुट गए थे। इस दौरान अस्पताल को ही उन्होंने अपना घर बना लिया था। 24 घंटे में सिर्फ 4 घंटे की आराम करते थे। डॉ. अजीत जैन बताते है कि मार्च के बाद लगातार 6 महीने काम करने के बाद वह सितंबर माह में अपने घर गए थे। उनका घर अस्पताल से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर कमला नगर में है, लेकिन मरीजों के प्रति अपने दायित्व के चलते वह घर नही गए थे। अस्पताल से ठीक होकर गए मरीजों के संपर्क में वह अब भी रहते हैं। एक व्हाट्सअप ग्रुप के माध्यम से वह सभी मरीजों से जुड़े हुए हैं। किसी भी रोगी को कोई समस्या होती है तो फोन पर उसके चिकित्सीय परामर्श भी देते हैं। 

महामारी से कुछ खोया भी 
कोरोना के कारण दिल्ली में 10,910 लोग जान गंवा चुके हैं। कई हजार परिवारों ने अपनों को खोया है। इसके अलावा  लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में काम करने वाले कई  लोगों ने यहां से पलायन करना शुरू कर दिया था। उस दौरान राजधानी की सड़कों पर सैकड़ों लोगों की भीड़ दिखाई दी थी। उनमें दिहाड़ी मजदूर हैं, कारीगर-मिस्त्री, छोटी-दुकानों पर काम करने वाली लेबर और रिक्शा चालक शामिल थे। यह लोग लॉकडाउन के बाद काम धंधा बंद होने के चलते वापिस अपने गांव चले गए थे। इस दौरान जो लोग दिल्ली में ही रहे, उन्होंने संघर्ष का एक दौर देखा। काम धंधा न होने के चलते आर्थिक हालात खराब हो गए थे। ऐसा लोगों की सहायता के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। इन लोगों को तीनो समय का भोजन उपलब्ध कराया गया। अब एक साल बाद हालात ठीक हो रहे हैं, लेकिन अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जिनकी जिंदगी पटरी पर नहीं आई है। 

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