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Delhi: आज किसान घाट पर किसानों की महारैली, पंजाब-हरियाणा के अलावा कई राज्यों से जुटेंगे हजारों किसान

Tue, 21 Jul 2026 06:13 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करवाने समेत किसानों की मांगो को लेकर विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा।
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किसान संगठनों के सदस्य - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को दिल्ली के किसान घाट पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करवाने समेत किसानों की मांगो को लेकर विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा। इसमें 550 किसान संघ और सिविल सोसाइटी के लोग शामिल होंगे। 

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बाद किसान संगठनों की आमद प्रशासन की परेशानियों को बढ़ा सकती है। यह बात और है कि युवा आंदोलन की पृष्ठभूमि में किसान संगठन इसे किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का नाम दे रहे थे, पर इसके प्रमुख घटक दल के नेता गुरनाम सिंह चढूनी की गिरफ्तारी और कक्रोच पार्टी के आंदोलन का कितना प्रभाव होगा यह देखना होगा। वैसे, किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार संधि लागू होने से गेहूं, धान, डेयरी और सब्जी उत्पादक किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा। सस्ते आयात से मंडियों में दाम गिरेंगे और छोटे किसानों की जमीनें कॉरपोरेट के हाथों में जाएंगी। सरकार से मांग है कि समझौते को तुरंत रद्द किया जाए और एमएसपी को कानूनी गारंटी दी जाए।

इन मांगों को लेकर किसान संघों का दावा है कि यह आर-पार की लड़ाई है, क्योंकि चढूनी की गिरफ्तारी किसानों का हौसला तोड़ने के लिए है। इसलिए किसानों ने यमुनानगर, अंबाला, सोनीपत समेत कई राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिए हैं। उधर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। अमृतसर समेत अन्य शहरों के किसान सुबह शंभू बॉर्डर से दिल्ली कूच करेंगे, जिन्हें वहीं रोकने के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 
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किसान पंचायतें करेंगे
आयोजकों के मुताबिक पंजाब-हरियाणा के अलावा प्रमुख रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा से हजारों किसान किसान घाट पहुंचेंगे। कई राज्यों से ट्रेनों और निजी वाहनों से भी लोग दिल्ली आएंगे। मोर्चा ने दावा किया था कि रैली के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। तब तक दिल्ली के आसपास के जिलों में किसान बैठकें-पंचायतें करेंगे।

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