सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों ने दिल्ली पुलिस के दो एएसआई के साथ मारपीट कर उन्हें बुरी तरह से घायल कर दिया। हमलावरों ने पुलिसकर्मियों को काफी देर तक कैंप में बंधक बनाए रखा। आंदोलनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर वीडियो बनाने का आरोप लगाकर उन पर हमला किया। घटना की जानकारी मिलने के बाद नरेला थाना पुलिस वहां पहुंचकर बंधक पुलिसकर्मियों को छुड़ाया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। नरेला थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और मारपीट करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घायल पुलिसकर्मियों की पहचान चंदर सिंह और रमेश के रूप में हुई है। दोनों पुलिसकर्मी बाहरी उत्तरी जिला के स्पेशल ब्रांच में एएसआई के पद पर तैनात हैं। दोनों की सिंघु बॉर्डर पर सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक तैनाती है। गुरुवार को दोनों सिंघु बॉर्डर पर तैनात थे। एएसआई रमेश ने अपने बयान में बताया कि दोपहर करीब साढ़े तीन बजे किसानों का एक जत्था पानीपत से दिल्ली आ रहा था। वह उसे देखने के लिए कुंडली की ओर संयुक्त किसान मोर्चा के पंडाल के पास चले गए। वहां वह पंडाल के फोटो खींच रहे थे।
इसी दौरान एक महिला अन्य लोगों के साथ वहां पहुंच गई और फोटो खींचने के बारे में पूछताछ करने लगी। रमेश के मुताबिक महिला उसे जासूस बताने लगी। रमेश अपने साथी एएसआई चंदर के साथ वापस दिल्ली की ओर आने लगे। हमलावर भी उनका पीछा करने लगे। नरेला सिंघु बॉर्डर नाले के पास महिला और कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। दोनों पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपना परिचय दिया और पहचान पत्र दिखाया। महिला दोनों को सरकार के जासूस बताकर लोगों को सबक सिखाने के लिए उकसाया। अचानक वहां मौजूद लोगों ने उनपर हमला कर दिया। दोनों की काफी पिटाई करने के बाद उन्हें कैंप ले गए। कैंप में उनसे पूछताछ की गई। घटना की जानकारी नरेला थाना पुलिस को दी गई।
मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी ने वहां पहुंचकर पुलिसकर्मी वहां से निकालक र ले गए। दोनों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस किसान नेताओं के जरिए मारपीट करने वाले आरोपियों की पहचान कर रही है।