नए कृषि कानूनों का लंबे समय से विरोध कर रहे किसान अभी आंदोलन स्थल से डिगने के मूड में नहीं हैं। सरकार की उदासीनता और मौसम (गर्मी ) की मार को सहने और उसका जवाब देने के लिए किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर तंबू ताने हुए हैं और इनमें बाकायदा एसी और फ्रिज की व्यवस्था भी कर रखी है। यहां तक कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भी एसी-कूलर मौजूद हैं। बताते हैं कि इस समय सिंघु बॉर्डर पर करीब 10 से 15 हजार किसान मौजूद हैं।
यहां पर आरओ वाटर फिल्टर है, वाटर कूलर है और अधिकांश लंगरों में फ्रिज भी मौजूद है। सैकड़ों लोगों को हर रोज भोजन मुहैया कराने वाले लंगरों का मेन्यू भी बदल गया है। अब खिचड़ी के अलावा रोटी भी है। और लस्सी तो है ही।
फतेहगढ़ साहिब से जसबीर सिंह (38) भी दूसरे प्रदर्शनकारियों की तरह यहां पर रोटेशन में आते हैं। जसबीर सिंह जिस तंबू में रहते हैं उसका ढांचा लोहे का बना है। उसका सामान पंजाब से ही लाया गया था। तंबू में एयर कूलर और फ्रिज भी है। जसबीर का कहना है कि कुछ दिनों के बाद जब दूसरा जत्था आएगा तो मैं वापस हो जाऊंगा।
फिरोजपुर से आए अमन सिंह (25) यहां तब से जमे हैं जब आंदोलन शुरू हुआ था। अपने दादा के साथ वे यहां पिछले नवंबर से मौजूद हैं। घर पर उनके पिता और भाई खेतों का काम संभालते हैं। अमन का कहना है कि खेती और इस समय कानूनों का विरोध दोनों ही जरूरी हैं। वे कहते हैं कि अगर हम काम नहीं करेंगे तो आज खाने के लिए कुछ नहीं होगा और विरोध नहीं करेंगे तो कल कुछ नहीं होगा।
अमन के अलावा सिंघु बॉर्डर पर उसके जिले के करीब 50 और लोग मौजूद हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार नए कानून वापस नहीं ले लेती वे नहीं लौटने वाले।