किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि जिस तरह लोकसभा और राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शब्दों का इस्तेमाल किया है, वह उनसे यह उम्मीद नहीं करते थे। एक तरफ वह किसान को अन्नदाता बोल रहे हैं और दूसरी तरफ किसानों को परजीवी कह रहे हैं। किसान किसी कीमत पर इन शब्दों को भूल नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खेती-बाड़ी को भी कॉर्पोरेट घरानों के हाथ में देना चाहती है। लेकिन इस देश का किसान ऐसा नहीं होने देगा।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बन गई है। सभी चीजों का निजीकरण किया जा रहा।। कुछ पूंजीपति मिलकर सरकार चला रहे। अगर कानून वापस नहीं दिए गए तो किसानों का जीवन बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अन्नदाता के सब्र का इम्तिहान ले रही है। आंदोलन इसी प्रकार शांतिपूर्वक चलता रहेगा। किसान न तो पुलिस से उलझेगा न ही प्रशासन से, लेकिन अगर किसानों के गांव में भाजपा का कोई भी नेता वोट मांगने आएगा तो उसका विरोध किया जाएगा।
आंदोलन पूरे देश का है
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन केवल एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश का आंदोलन है। कर्नाटक और तमिलनाडु के किसान भी आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं। गुजरात के किसान भी भाग लेना चाहते हैं लेकिन उन्हें जेल में डाला जाता है। टिकैत ने कहा कि सरकार लग रहा है कि गर्मियों के मौसम में किसान दिल्ली की सीमाओं को छोड़कर चले जाएंगे। लेकिन, ऐसा नहीं होगा। आने वाले दिनों में बॉर्डर पर टेंट की व्यवस्था की जाएगी और पंखे भी लगाए जाएंगे। अगर प्रशासन ने बिजली की सुविधा नहीं दी तो जनरेटर से काम चलाएंगे।