नोएडा के पॉश इलाके में चल रहे फर्जी प्लेसमेंट सेंटर का भंडाफोड़
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने नौकरी दिलवाने का झांसा देकर बेरोजगार नौजवानों से करोड़ों की ठगी करने वाले एक फर्जी जॉब प्लेसमेंट सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गैंग सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की मानें तो आरोपियों ने बीते करीब आठ माह में एक हजार युवाओं से दो करोड़ से अधिक की रकम ठग ली। गैंग ने नोएडा सेक्टर-8 के पॉश इलाके में फर्जी सेंटर खोला हुआ था। वहीं से सारा गोरखधंधा चल रहा था। कॉल सेंटर से एक सर्वर, 13 हार्ड डिस्क, 18 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और अन्य सामान पुलिस ने बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों के पांच बैंक खाते भी सीज किए हैं। पकड़े गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।
साइबर क्राइम यूनिट के पुलिस उपायुक्त अनेश रॉय ने बताया कि आरोपियों की पहचान गैंग सरगना सेक्टर-74, नोएडा निवासी कुणाल सिंह (35), जलालाबाद, शाहजहांपुर, यूपी निवासी गौरव गुप्ता (26), गोविंदपुरी, मोदी नगर, यूपी निवासी विशाल तंवर उर्फ सन्नी (23), शुभम (23), नंदग्राम, गाजियाबाद निवासी शशांक शेखर (29) और केरल निवासी कल्पेंद्र सिंह राजपूत (42) के रूप में हुई है। पिछले दिनों साइबर सेल यूनिट में एक महिला वकील ने नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगी करने की शिकायत पुलिस को दी थी। पीड़िता ने बताया कि उसने अपना बायोडाटा एक फ्री ऑन लाइन जॉब पोर्टल पर दिया था। इस बीच उसके मोबाइल पर इंटरनेट नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को नामी ऑनलाइन कंपनी का प्रतिनिधि बताकर उसे बड़ी कंपनियों में नौकरी लगवाने की बात कही। बाद में रजिस्ट्रेशन के नाम पर उससे कुछ रकम ले ली गई। बाद में दस्तावेज के सत्यापन के नाम पर कुछ रुपये और ले लिए। धीरे-धीरे आरोपियों ने पीड़िता से 34 हजार रुपये ऐंठ लिए। पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ तो उसने आरोपियों से पैसे वापस करने का दबाव बनाया।
इधर आरोपियों ने जल्द रुपये वापस करने की बात कह पीड़िता को एक पेमेंट लिंक व प्रोमो भेज दिया। पीड़िता ने उसे डाउनलोड किया तो उसके यूपीआई लिंक पेमेंट एप अकाउंट से और पैसे कट गए। मामले की शिकायत पीड़िता ने पुलिस से की। पुलिस ने छानबीन शुरू की। जांच के लिए एसीपी रमन लांबा, इंस्पेक्टर भानू प्रताप और एसआई सुनील सिंधू की टीम ने आरोपियों की तलाश की। टेक्निकल सर्विलांस की जांच की गई तो पता चला कि आरोपी नोएडा सेक्टर-8 में एक पॉश इलाके में प्लेसमेंट एजेंसी चलाते हैं। सूचना के बाद पुलिस ने 20 सितंबर को वहां छापा मारकर सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। छानबीन के दौरान आरोपियों के पास से 10 हजार बेरोजगार युवाओं के बायोडाटा मिला। आरोपियों ने बताया कि इन लोगों ने फरवरी माह में यह कॉल सेंटर खोला है। पिछले आठ माह के दौरान इन लोगों ने करीब एक हजार युवाओं से दो करोड़ से अधिक की रकम ठगी है।
कौन हैं पकड़े गए आरोपी...
पुलिस की पूछताछ में आरोपी कुणाल सिंह ने बताया कि वह गैंग का मास्टर माइंड है। मूलरूप से वह मुजफ्फरनगर, यूपी का रहने वाला है। कुछ वर्ष पूर्व वह नोएडा में एक कॉल सेंटर में नौकरी करता था। वहां से उसे ठगी करने का पता चला। इससे पूर्व कुणाल पुणे में इसी तरह ठगी के मामले में 2016 में गिरफ्तार हुआ था। वहीं विशाल यूपी से ग्रेजुएट है। शुभम मोदी नगर से डिप्लोमा इंजीनियरिंग कर रहा है। बाकी सभी आरोपी स्कूल छोड़े हुए हैं। कल्पेंद्र सिंह राजपूत इन लोगों को फर्जी कागजात के आधार पर अकाउंट उपलब्ध करवाता था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
ऐसे की जाती थी ठगी...
आरोपी कुणाल ने बताया कि उसने नोएडा के पॉश इलाके में अपना कॉल सेंटर खोला। वहां 17 सिस्टम लगाकर कॉमन सर्वर लगवाया। इसके बाद बेरोजगार युवाओं का डाटा उसने कई प्लेसमेंट कंपनियों से खरीदा। उसके बाद आरोपी इंटरनेट नंबर से पीड़ितों को कॉल कर उन्हें नामी कंपनियों में नौकरी लगवाने का झांसा देते। कभी रजिस्ट्रेशन फीस तो कभी दस्तावेज जांच चेकिंग े नाम पर फीस लेकर आरोपी बेरोजगारों से मोटी रकम ऐंठ लेते थे। पीड़ित जब अपनी रकम वापस मांगते थे तो आरोपी उनके यूपीआई लिंक एप से भी पैसे हड़प लेते थे।
फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने के लिए खोला हुआ है यूट्यूब न्यूज चैनल...
आरोपी जिस परिसर में अपना कॉल सेंटर चलाते थे, उसी परिसर में आरोपी एक यूट्यूब न्यूज चैनल भी चलाता था। यह सब फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने के लिए किया जा रहा था। आरोपी कुणाल ने बताया कि आई स्टार 24 नामक से चैनल खोला हुआ था। पुलिस कुणाल से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।