दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने प्रर्वतन निदेशालय(ईडी) व भ्रष्टाचार निरोधक शाखा(एसीबी) के अधिकारी बनकर मोटी रकम ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर मास्टरमाइंड समेत पांच को दबोचा है। आरोपी इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों को अपना शिकार बनाते थे। ये रकम ऐंठने के लिए ईडी का फर्जी सम्मन(नोटिस) भी भेजते थे। इनके कब्जे से फर्जी आईडी से लिए गए एटीएम कार्ड व मोबाइल नंबर व लैपटॉप आदि बरामद किया है। आरोपी काफी लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं।
अपराध शाखा डीसीपी राजेश देव के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओल्ड मुस्ताफाबाद निवासी जुनैद(24) व मो.शादाब खान(35), वैशाली, सेक्टर-6 गाजियाबाद यूपी निवासी मास्टरमाइंड राहुल(30), शाहाबेरी ग्रेटर नोएडा निवासी नवीन कुमार (24) और दिल्ली निवासी सुमित शर्मा(31) के रूप में हुई। ईडी के उप-निदेशक ने 17 अगस्त को अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों को ईडी का नोटिस मिला है, जोकि फर्जी है।
एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने विभिन्न पॉलिसी में वर्ष 2013 के बाद पैसा लगाना शुरू किया था। कुछ समय से उसके पास फोन आने लग गए कि वह पॉलिसी को क्लियर करने के लिए एडवांस इनकम टैक्स जमा कराए। शिकायर्तकर्ता ने विभिन्न खातों में 10 लाख 60 हजार रुपये जमा करा दिए। इसके बाद आरोपियों ने ईडी व एसीबी के अधिकारी बनकर और पैसा ऐंठना शुरू कर दिया। आरोपियों ने पीड़ित को ईडी का नोटिस भी भेज दिया था।
शिकायकर्ता ने दिल्ली पुलिस के पास शिकायत की थी फिर ईडी के पास मामला कैसे चला गया। ये सोचकर उसने ईडी अधिकारियों से संपर्क किया। जांच में पता लगा कि सम्मन फर्जी है और आरोपियों के मोबाइल, बैंक खातें आदि फर्जी आईडी से खोले हुए हैं। इंस्पेक्टर वीएन झा को पता लगा कि गिरोह कौशांबी, गाजियाबाद में कहीं से चल रहा है। ये बैंक खातों से पैसा निकालने के लिए विभिन्न एटीएम का इस्तेमाल करते हैं। इंटरस्टेट सेल एसीपी संदीप लांबा की देखरेख में इंस्पेक्टर वीएन झा व एसआई लोकेन्द्र की टीम ने आरोपियों को बुधवार को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे करते हैं ठगी
मास्टरमाइंड राहुल ने बताया कि वह जनवरी, 2019 से इस गिरोह को चला रहा है। पहले वह सेक्टर-63, नोएडा स्थित इंडिया इंफोलाइन में बतौर इंश्योरेंस काम करता था। सरकारी नियमों के अवहेलना के चलते कंपनी बंद हो गई। जुनैद व शादाब भी इसके साथ काम करते थे। बंद होने के समय इन्होंने ऑफिस से पॉलिसी धारकों का डाटा चुरा लिया था। इसके बाद ये पॉलिसी अधिकारी बनकर ठगी करने लग गए। शुरू में ये पॉलिसी धारकों को झांसा देते थे कि उनको भारी बोनस मिलेगा और उसके लिए प्रोसेस फीस देनी होगी। सुमित व नवीन भी उनकी कंपनी सिवीटेक बंद होने के बाद इस गिरोह में शामिल हो गए। इनके पास से भी ग्राहकों का डाटा था। इसके बाद ये ग्राहकों से ईडी व एसीबी के अधिकारी बनकर मोटी रकम ऐंठते थे।