नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली के दंगों से संबंधित मामलों के लंबित रहने पर निराशा व्यक्त करते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा मामले में नियुक्त विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) के अलावा जांच अधिकारी के उपस्थिति न होने से मामले का जल्द निपटारा करना संभव नहीं हो पा रहा। मामले में अपराध शाखा के अधिकारियों का रवैया भी उदासीन रहा है।
कड़कड़डूमा कोर्ट के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने संबंधित जेल अधीक्षकों से आरोपियों इब्राहिम और जलालुद्दीन को कोर्ट में पेश नहीं करने पर स्पष्टीकरण मांगा है।
अदालत दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज दंगों के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या और एक डीसीपी को सिर में चोट लगने के मामले में सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई नहीं करने के लिए जांच अधिकारी के साथ-साथ अपराध शाखा के डीसीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया था।
उन्होंने कहा एक नवंबर, 2021 के आदेश के अनुसार जांच अधिकारी द्वारा किसी एक आरोपी को संबंधित आरोपपत्र व अन्य दस्तावेज की कम प्रतियों की आपूर्ति के संबंध में रिकॉर्ड पर कुछ दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह एक सह-आरोपी को भी पूरे दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
अदालत ने कहा बावजूद इसके जांच अधिकारी और एसपीपी अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने मामले की सुनवाई 17 जनवरी 22 तय की है।
अदालत ने एक आरोपी को जेल में उसके परिजनों से एक जोड़ी जूते लेने की भी अनुमति दी है। उक्त निर्देश की एक प्रति जेल अधीक्षक को भेजी गई ताकि आरोपी को नियमानुसार अपने परिवार से जूते प्राप्त करने की अनुमति मिल सके।
24 फरवरी 2020 को एक सिपाही के बयान पर दयालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार जब सिपाही चांद बाग क्षेत्र में ड्यूटी पर था तब हिंसक प्रदर्शनकारी उस वक्त लागू सभी निर्देशों की अनदेखी करते हुए लोहे की रॉड, लाठियों आदि के साथ मुख्य सड़क पर जमा हो गए।
भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एसीपी गोकुलपुरी, डीसीपी शाहदरा और हेड कांस्टेबल रतन लाल पर हमला कर दिया जिससे वे सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
गंभीर रूप से घायल सभी व्यक्तियों को अस्पताल ले जाया गया, जहां हेड कांस्टेबल रतन लाल को डॉक्टरों ने गंभीर चोटों के कारण मृत घोषित कर दिया। शाहदरा के डीसीपी को सिर में चोटें आई थीं और वह बेहोश हो गए थे।