दिल्ली की सबसे पुरानी सभ्यता की खोज के लिए पुराने किले की खुदाई का काम फिर से शुरू किया गया है। इससे पहले 2017-18 में किले की खुदाई की गई थी, तब यहां मौर्य काल तक के प्रमाण मिले थे। अब इससे आगे की सभ्यता की खोज के लिए खुदाई हो रही है।
इतिहासकारों को अनुमान है कि दिल्ली सात बार नहीं, बल्कि करीब 12 बार बसी-उजड़ी। जिस टीले पर पुराना किला स्थित है, एकमात्र यही जगह है जिसके नीचे इन सारी सभ्यताओं का इतिहास दफन हो सकता है, जिसे खोजनेे की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में पुराने किले के अंदर दिल्ली के 2500 साल पुराने इतिहास को एक जगह देखने की व्यवस्था की जाएगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) पुराने किले की 1954 से लेकर अबतक हुई खुदाई में मिले सभी ऐतिहासिक प्रमाणों का संग्रह किले के अंदर संरक्षित करके लोगों के देखने के लिए रखा जाएगा।
इससे पहले 1954-55 और दोबारा 1969-73 में पदमश्री बीबी लाल की अगुवाई में पुराने किले की खुदाई की गई थी। इसके बाद तीसरी बार 2013-14 व चौथी बार 2017-18 में अगुवाई में खुदाई की गई थी। अब पांचवां मौका है।
दिल्ली की सबसे पुरानी सभ्यता क्या
मान्यता है कि यह जगह पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ हो सकती है। जिस जगह पांडवों की राजधानी थी, मौजूदा समय उसी टीले पर पुराना किला स्थित है। फिलहाल वसंत कुमार स्वर्णकर का कहना है कि अभी तक लोग दिल्ली के ब्रिटिश कालीन और मुगलकालीन इतिहास को ही जानते हैं। लेकिन पुराना किला जिस टीले पर बसा वहां की सबसे पुरानी सभ्यता कौन थी, यह पता लगाने के लिए फिर से खुदाई शुरू हुई है।
सात फुट खोदने पर मिले मौर्य काल के प्रमाण
एएसआई की टीम को 2017-18 में सात फुट खुदाई के दौरान मौर्य काल से जुड़ी कई चीजें मिली थीं। इसमें चूड़ी, सिक्के, दरांती, फल सब्जी काटने का छोटा चाकू, टेराकोटा के खिलौने, पकी हुई ईंट, मनके, टेराकोटा की मूर्तियां, मुहरें, पानी निकासी के लिए नालियां समेत अन्य सामान मिले हैं। वसंत कुमार स्वर्णकर नेबताया कि अभी खुदाई का काम शुरू ही हुआ है, उम्मीद है कि इससे आगेे के इतिहास के साक्ष्य जरूर मिलेंगे।